अमेरिका में रूस से तेल आयात करने वाले देशों पर 100% टैरिफ का बिल पास | world news
अमेरिकी संसद के निचले सदन हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स ने रूस और ईरान से जुड़े एक कड़े प्रतिबंधात्मक विधेयक को पारित कर दिया है। इस नए घटनाक्रम के तहत, रूस से बड़े पैमाने पर कच्चਾ तेल आयात करने वाले पांच देशों को निशाना बनाया गया है, जिनमें भारत, चीन, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान शामिल हैं। राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद यह विधेयक कानून का रूप ले लेगा, जिससे इन देशों से अमेरिका को होने वाले निर्यात पर भारी शुल्क का खतरा मंडरा रहा है [world news]।
भारत वर्तमान में अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा रूस से आयातित सस्ते कच्चे तेल के जरिए पूरा कर रहा है। यूक्रेन संघर्ष के बाद शुरू हुए इस व्यापारिक संबंध ने भारत को मॉस्को का एक प्रमुख तेल खरीदार बना दिया है। हालांकि, अमेरिकी नीति निर्माताओं द्वारा लाए गए ‘लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026’ के तहत यदि अमेरिका इस टैरिफ को लागू करता है, तो भारतीय उत्पादों जैसे टेक्सटाइल, जेम्स और केमिकल्स का अमेरिकी बाजार में टिकना मुश्किल हो सकता है।
भारतीय विदेश मंत्रालय ने इस स्थिति पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए स्पष्ट किया है कि देश की ऊर्जा सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। यदि भारत रूस से तेल आयात बंद करता है, तो वैकल्पिक स्रोतों से महंगे दामों पर तेल खरीदने के कारण देश में घरेलू ईंधन की कीमतें बढ़ सकती हैं, जिससे आम जनता पर महंगाई का सीधा बोझ पड़ेगा।
