लखनऊ में रेफरल तंत्र की लापरवाही से 22 दिन की मासूम की दर्दनाक मौत | lucknow news
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की एक बार फिर से गंभीर लापरवाही सामने आई है, जहाँ सर्पदंश से जूझ रही महज 22 दिन की एक मासूम को बचाने के बजाय अस्पतालों की कागजी कार्रवाई और रेफरल प्रक्रिया ने उसकी जान ले ली। [lucknow news] इस हृदयविदारक घटना ने चिकित्सा तंत्र की संवेदनशीलता पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
घटना निगोहां के उदयपुर गांव की है, जहाँ एक परिवार में कुछ ही दिन पहले गूंजी किलकारियां अचानक मातम में बदल गईं। रात के वक्त सोते समय एक जहरीले सांप ने नवजात बच्ची की उंगली को डस लिया। घबराए परिजन तुरंत बच्ची को लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) मोहनलालगंज पहुंचे। आरोप है कि वहां प्राथमिक उपचार देने के बजाय डॉक्टरों ने बिना देर किए उसे सिविल अस्पताल रेफर कर दिया।
जब परिजन एम्बुलेंस या निजी साधन से बच्ची को लेकर सिविल अस्पताल पहुंचे, तो वहां अजीबोगरीब स्थिति पैदा हो गई। चिकित्सकों ने परिजनों से काटने वाले सांप की फोटो दिखाने की मांग की। फोटो न होने पर डॉक्टरों ने इलाज करने से मना कर दिया और बच्ची को झलकारीबाई अस्पताल जाने को कह दिया। इस तरह एक के बाद एक अस्पतालों के चक्कर काटने और समय पर एंटी स्नेक वेनम न मिलने के कारण बच्ची की हालत लगातार बिगड़ती चली गई।
परिजनों का कहना है कि झलकारीबाई अस्पताल जाने के लिए जब कोई एम्बुलेंस नहीं मिली, तो वे गंभीर रूप से अचेत बच्ची को लेकर पैदल ही अस्पताल की तरफ दौड़े। हालांकि, जब तक वे अस्पताल पहुंचे, बहुत देर हो चुकी थी और डॉक्टरों ने बच्ची को मृत घोषित कर दिया। इस घटना के बाद से पूरे इलाके में आक्रोश का माहौल है और लोग स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठा रहे हैं।
इस तरह की प्रशासनिक और चिकित्सकीय लापरवाही सीधे तौर पर आम जनता के जीवन से खिलवाड़ है। यदि समय रहते अस्पतालों में उचित एंटी स्नेक वेनम और प्राथमिक उपचार मिल जाता, तो शायद इस मासूम की जान बचाई जा सकती थी। स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य अधिकारियों ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच के आदेश दिए हैं, लेकिन यह घटना व्यवस्था के माथे पर एक बड़ा कलंक बन गई है।
