भारतीय भाषाओं को up politics news और शिक्षा की सशक्त भाषा बनाने पर जोर
लखनऊ के बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय (बीबीएयू) में भारतीय भाषा समिति और शिक्षा मंत्रालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला का सफलतापूर्वक समापन हो गया है। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य देश की समृद्ध ज्ञान परंपरा और संस्कृति को भारतीय भाषाओं के माध्यम से नई पीढ़ी तक पहुंचाना था, ताकि शिक्षा और अनुसंधान का दायरा अधिक समावेशी बन सके।
शिक्षा और शोध का भारतीयकरण
कार्यशाला के दौरान वक्ताओं ने इस बात पर विशेष बल दिया कि राष्ट्र की प्रगति के लिए अपनी मातृभाषाओं का सशक्त होना बेहद आवश्यक है। काशी विद्यापीठ के विद्वानों ने भाषा को सांस्कृतिक पहचान बताते हुए इसे केवल संवाद तक सीमित न रखने की वकालत की। शिक्षा के भारतीयकरण और राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रावधानों के अनुरूप भारतीय भाषाओं को उच्च शिक्षा में उचित स्थान दिलाने की रूपरेखा पर भी मंथन किया गया।
डिजिटल माध्यमों से प्रसार और भविष्य की दिशा
बदलते दौर के साथ कदम ताल मिलाते हुए डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए भारतीय भाषाओं में ई-बुक्स और ऑनलाइन पाठ्य सामग्री तैयार करने पर जोर दिया गया। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे शोध कार्यों को एक नई दिशा मिलेगी और अकादमिक सामग्रियां अधिक सुलभ हो सकेंगी। इस पहल से न केवल विद्यार्थियों को अपनी भाषा में पढ़ने का अवसर मिलेगा, बल्कि अनुसंधान भी समाज की जमीनी समस्याओं से बेहतर ढंग से जुड़ सकेंगे।
