लखनऊ मर्डर: धीरेंद्र प्रताप सिंह की हत्या का मास्टरमाइंड ड्राइवर रवि, 12 लाख और आलीशान घर का था सौदा
उन्नाव के एनजीओ संचालक धीरेंद्र प्रताप सिंह की हत्या के पीछे की कहानी बेहद खौफनाक है। शूटरों को धीरेंद्र की हत्या के बदले 12 लाख रुपये मिलने वाले थे, जबकि ड्राइवर रवि और उसके साथी दिलीप को लखनऊ में एक मकान और दुकान देने की बात तय हुई थी। अपहरण के समय रवि और दिलीप धीरेंद्र के साथ थे। रवि ने ही शूटरों को बुलाने के लिए लाइव लोकेशन भेजी थी। शूटरों के आने पर धीरेंद्र की हत्या कर दी गई। विरोध करने पर उसकी आंखों में मिर्च पाउडर झोंका गया और फिर गोलियां बरसाई गईं। पुलिस ड्राइवर रवि और दिलीप से पूछताछ कर हत्या के मुख्य सूत्रधार का पता लगाने की कोशिश कर रही है। पुलिस ने वारदात में इस्तेमाल हुई फॉर्च्यूनर कार बरामद कर ली है, लेकिन हत्या में प्रयुक्त असलहा अभी भी पुलिस की पकड़ से बाहर है।
हत्या के बाद, ड्राइवर रवि ने धीरेंद्र के मोबाइल से खुद और गनर को मैसेज भेजकर यह जताने की कोशिश की कि वह जा रहा है और किसी को उसकी लोकेशन शेयर न करे। यह उसके खुद को बचाने का एक प्रयास था।
पुलिस की पूछताछ में रवि का झूठ पकड़ा गया। धीरेंद्र के घर न पहुंचने पर उसकी पत्नी ममता ने फोन किया था, जिसे रवि ने उठाया और बताया कि धीरेंद्र थोड़ी देर में आएगा। जब रवि खुद धीरेंद्र की गुमशुदगी दर्ज कराने थाने पहुंचा, तो पुलिस ने उससे और ममता से पूछताछ की। शक रवि पर गहरा गया और कड़ाई से पूछताछ करने पर उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया।
सात साल तक धीरेंद्र के साथ परछाई की तरह रहने वाले रवि पर धीरेंद्र बहुत भरोसा करता था। धीरेंद्र प्रॉपर्टी की खरीद-फरोख्त और लाखों के लेन-देन का काम अक्सर रवि के भरोसे ही गाड़ी में छोड़कर चला जाता था। धीरेंद्र का पुलिस-प्रशासन के अफसरों और नेताओं से भी जुड़ाव था, जिसकी तस्वीरें वह सोशल मीडिया पर साझा करता था। परिवार और करीबियों के अनुसार, धीरेंद्र अपने फाउंडेशन के माध्यम से कई सामाजिक कार्य भी करते थे।
