27 साल बाद पशु चोरी केस में बरी, Agra कोर्ट ने आरोपी को किया बरी
आगरा की एक अदालत ने 27 साल पुराने पशु चोरी के एक मामले में आरोपी किशन को बरी कर दिया है। यह फैसला साक्ष्य के अभाव में सुनाया गया, क्योंकि मामले के शिकायतकर्ता और गवाह अदालत में गवाही देने के लिए उपस्थित नहीं हुए।
यह मामला 1998 का है जब चंद्र मोहन ने रकाबगंज थाने में तहरीर देकर आरोप लगाया था कि तीन लोगों ने पशु चुराकर ऑटो में लाद लिया। पुलिस ने किशन, मोती और संजीव के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था। संजीव की मुकदमे के दौरान मृत्यु हो गई, जबकि मोती की पत्रावली अलग कर दी गई।
27 वर्षों के दौरान, अभियोजन पक्ष केवल एक गवाह को अदालत में पेश कर सका, जो बाद में अपनी गवाही से मुकर गया। वादी और अन्य गवाहों की अनुपस्थिति के कारण, अदालत के पास आरोपी किशन को बरी करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा। इस लंबी कानूनी प्रक्रिया और साक्ष्य की कमी ने न्याय को विलंबित किया, जिसका सीधा असर आम जनता के विश्वास पर पड़ता है।
