यूपी सबोर्डिनेट परीक्षा में हाईटेक नकल, अंडरगारमेंट में डिवाइस, 20 लाख का सौदा
विज्ञान के नए आविष्कारों का इस्तेमाल फर्जीवाड़े में करने के नए तरीके सामने आ रहे हैं। इसी कड़ी में लखनऊ में उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की सम्मिलित अवर अधीनस्थ सेवा (स्नातक स्तरीय) मुख्य परीक्षा में एक हाईटेक नकल का मामला पकड़ा गया है। यहां एक युवक अंडरगारमेंट में एक ऐसा डिवाइस लगाकर आया था जिसे स्कैनर भी नहीं पकड़ सका। परीक्षा के दौरान नकल का प्रयास करते हुए शक होने पर अभ्यर्थी को एसटीएफ और महानगर पुलिस की संयुक्त टीम ने पकड़ा, तब इस हाईटेक नकल का खुलासा हुआ। इस परीक्षा के लिए 20 लाख रुपये का सौदा हुआ था, जिसमें 10 लाख रुपये एडवांस के तौर पर दिए गए थे।
गिरफ्तारी के बाद हुई पूछताछ में पता चला कि अभ्यर्थी अंत:वस्त्रों में डिवाइस के साथ ही कान में ब्लूटूथ लगाकर परीक्षा दे रहा था। पुलिस ने पूछताछ के आधार पर इस गिरोह के सरगना को प्रयागराज से गिरफ्तार कर लिया है। एसटीएफ के अनुसार, गिरफ्तार अभ्यर्थी ब्रजेश कुमार यादव जौनपुर का रहने वाला है और प्रयागराज में रहकर परीक्षा की तैयारी कर रहा था। रविवार को वह लखनऊ के दयानंद कन्या इंटर कॉलेज में परीक्षा दे रहा था, तभी सूचना पर टीम ने उसे पकड़ा। तलाशी में उसके कान से कारतूस के आकार का ब्लूटूथ और अंत:वस्त्रों में सिम लगा डिवाइस मिला।
पूछताछ में गिरोह के सरगना रमेश चंद्र पटेल का नाम सामने आया, जिसे पुलिस ने देर शाम प्रयागराज से गिरफ्तार कर लिया। एसीपी महानगर अंकित कुमार ने बताया कि गिरोह के सरगना रमेश ने ही डिवाइस की व्यवस्था कर ब्रजेश को दी थी और 20 लाख रुपये में सौदा तय हुआ था। ब्रजेश ने 10 लाख रुपये का भुगतान कर दिया था, बाकी रकम परीक्षा पास करने के बाद दी जानी थी। ब्रजेश के पास से एक ब्लूटूथ डिवाइस, एक मोबाइल, एक प्रवेशपत्र, एक आधार कार्ड, एक ओएमआर शीट और एक मूल प्रश्नपत्र बरामद हुआ है।
इस हाईटेक तरीके से अभ्यर्थी ने परीक्षा केंद्र पर लगे स्कैनर को भी मात दे दी थी। डिवाइस और ब्लूटूथ को उसने अपनी नेकर में एक अलग से सिलवाई गई पॉकेट में छुपा रखा था। एसीपी ने बताया कि ब्रजेश शनिवार रात प्रयागराज से इंटरसिटी ट्रेन से लखनऊ आया था और एक होटल में रुका था। पुलिस जब होटल पहुंची तो वह अपने साथी के साथ चेकआउट कर निकल चुका था, जिसकी तलाश जारी है। इस तरह के मामले परीक्षाओं की शुचिता पर सवाल खड़े करते हैं और परीक्षार्थियों के भविष्य को प्रभावित करते हैं।
