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आवारा कुत्तों का आतंक: 37 लाख से अधिक हमले, 54 मौतें; SC में सुनवाई, India rabies control पर जोर

By Jan 8, 2026

सुप्रीम कोर्ट में इन दिनों आवारा कुत्तों की समस्या पर अहम सुनवाई चल रही है, जिसमें स्कूलों और अस्पतालों जैसी संवेदनशील जगहों पर उनकी मौजूदगी पर सवाल उठाए जा रहे हैं। अदालत ने इस मामले को स्वतः संज्ञान में लेते हुए सुनवाई शुरू की है।

पिछले साल, देश भर में कुत्तों से संबंधित विभिन्न मामलों को एकीकृत सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट ने अपने पास मंगवा लिया था। इस बीच, सरकार ने लोकसभा में चौंकाने वाले आंकड़े पेश किए हैं। पशुपालन मंत्री द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, जनवरी 2024 से दिसंबर 2024 तक देश के ग्रामीण इलाकों में कुत्तों के काटने के 21 लाख 95 हजार 122 मामले दर्ज किए गए, जिनमें 37 लोगों की मौत हुई। अन्य जानवरों के काटने के भी पांच लाख से अधिक मामले सामने आए, जिनमें 11 मौतें हुईं। खास तौर पर, 15 साल से कम उम्र के पांच लाख से अधिक बच्चों को आवारा कुत्तों ने निशाना बनाया।

प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) के एक हालिया बयान के अनुसार, 2024 में पूरे देश में कुत्तों के काटने के कुल 37 लाख 15 हजार 713 मामले दर्ज हुए, जो 2023 के 30 लाख 52 हजार 521 मामलों की तुलना में 20% से अधिक की वृद्धि दर्शाता है। महाराष्ट्र इस समस्या से सबसे अधिक प्रभावित है, जहां चार लाख 85 हजार से अधिक मामले सामने आए, इसके बाद तमिलनाडु और गुजरात का स्थान है। लक्षद्वीप एक ऐसा केंद्र शासित प्रदेश रहा जहां कोई मामला दर्ज नहीं हुआ।

रैबीज संक्रमण से होने वाली मौतों के आंकड़ों में भी चिंताजनक वृद्धि देखी गई है। 2024 में 54 मौतें दर्ज की गईं, जबकि 2023 में यह संख्या 50 और 2022 में 21 थी। महाराष्ट्र में सर्वाधिक 14 मौतें हुईं, जबकि उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में छह-छह मौतें दर्ज की गईं।

इस गंभीर स्थिति से निपटने के लिए, सरकार ने पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 के तहत पशु जन्म नियंत्रण नियम बनाए हैं। इन नियमों का उद्देश्य आवारा कुत्तों की आबादी को नियंत्रित करना, रैबीज का उन्मूलन करना और मानव-कुत्ता संघर्ष को कम करना है, जिसमें नसबंदी और टीकाकरण जैसे उपाय शामिल हैं। सरकार का लक्ष्य 2030 तक रैबीज से होने वाली मौतों को पूरी तरह समाप्त करना है, जिसके लिए राष्ट्रीय रैबीज नियंत्रण कार्यक्रम चलाया जा रहा है। 2019 की पशु गणना के अनुसार, देश में कुत्तों की आबादी डेढ़ करोड़ से अधिक है।

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