उसर भूमि के लिए गेहूं की नई किस्में, सरसों में 39.6% तेल: किसानों को बड़ी सौगात
चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (सीएसए) के वैज्ञानिकों ने किसानों के लिए तीन नई फसल प्रजातियां विकसित की हैं, जो उनकी आय बढ़ाने और फसल नुकसान को कम करने में मदद करेंगी। गेहूं की दो नई प्रजातियां, के-1905 और के-1910, विशेष रूप से उसर भूमि के लिए तैयार की गई हैं। ये किस्में न केवल उसर भूमि पर अच्छी पैदावार देंगी, बल्कि भूरा, पीला व काला रस्ट जैसे रोगों के प्रति भी अवरोधी होंगी। साथ ही, इन पर कीटों का प्रभाव भी कम पड़ेगा। ये प्रजातियां 125 से 130 दिनों में पककर तैयार हो जाती हैं और प्रति हेक्टेयर 35 से 40 क्विंटल तक की पैदावार दे सकती हैं।
सरसों की नई प्रजाति ‘आजाद गौरव’ को विलंबित बुवाई के लिए पूरे उत्तर प्रदेश में संस्तुत किया गया है। इस किस्म के पौधों पर उच्च तापमान का प्रभाव कम पड़ता है। यह 120 से 125 दिनों में तैयार हो जाती है और औसतन 18 से 19 क्विंटल प्रति हेक्टेयर पैदावार देती है। यह रोग प्रतिरोधी है और इस पर भी कीटों का प्रभाव कम रहता है। इस किस्म की एक खास बात यह है कि इसके दाने बड़े होते हैं और तेल की मात्रा 39.6% तक पाई गई है। इन नई प्रजातियों के विकास से किसानों को बेहतर उपज और अधिक लाभ मिलने की उम्मीद है, जिससे कृषि क्षेत्र को मजबूती मिलेगी।
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