NDA politics: जब वाजपेयी को हटाना चाहते थे कुछ नेता, तब ममता बनर्जी ने दिया था साथ
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती के अवसर पर उनके राजनीतिक जीवन से जुड़ी कई बातें याद की जा रही हैं। वाजपेयी के पूर्व मीडिया सलाहकार अशोक टंडन ने अपनी नई किताब ‘अटल संस्मरण’ में एक महत्वपूर्ण घटना का खुलासा किया है। यह घटना 1999 की है, जब वाजपेयी की 13 महीने पुरानी NDA सरकार सिर्फ एक वोट से गिर गई थी। इस दौरान गठबंधन के भीतर ही कुछ नेताओं ने वाजपेयी को दरकिनार कर वैकल्पिक सरकार बनाने की योजना बनाई थी।
टंडन के अनुसार, जब यह विचार सामने आया, तो तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने इसका कड़ा विरोध किया। उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि अगर वाजपेयी प्रधानमंत्री नहीं होंगे, तो वह किसी वैकल्पिक NDA सरकार का समर्थन नहीं करेंगी। ममता बनर्जी के साथ-साथ नवीन पटनायक और वाइको जैसे नेताओं ने भी इस कदम का विरोध किया। इस विरोध के कारण वाजपेयी को हटाने की यह योजना शुरुआती चरण में ही विफल हो गई।
ममता बनर्जी वाजपेयी को अपना मार्गदर्शक मानती थीं और दोनों के बीच व्यक्तिगत संबंध भी काफी मजबूत थे। 6 जुलाई 2000 को वाजपेयी ने कोलकाता में ममता बनर्जी के घर का दौरा किया था। उन्होंने ममता की मां गायत्री देवी के पैर छुए थे, जो दोनों नेताओं के बीच गहरे सम्मान को दर्शाता है। यह घटनाक्रम आज की राजनीति के संदर्भ में भले ही अजीब लगे, लेकिन उस समय दोनों के बीच राजनीतिक और व्यक्तिगत सौहार्द था।
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