नीतीश कुमार: जंगल राज से विकास की ओर बिहार की अभूतपूर्व यात्रा
बिहार की राजनीति में 2005 एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ, जब नीतीश कुमार ने तत्कालीन ‘जंगल राज’ के आरोपों से घिरे प्रदेश की कमान संभाली। इस चुनाव में जदयू और भाजपा गठबंधन को मिली भारी जीत ने राज्य की जनता की उम्मीदों को नया पंख दिया। 1990 से 2005 तक लालू यादव और राबड़ी देवी के शासनकाल को अक्सर ‘जंगल राज’ के दौर के रूप में याद किया जाता है, जब राज्य में कानून व्यवस्था की स्थिति अत्यंत चिंताजनक थी और जाति-आधारित हिंसा की घटनाओं ने प्रदेश को कलंकित किया था।
तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने भी इस दौर की आलोचना करते हुए इसे देश के लिए शर्म का विषय बताया था। उन्होंने कहा था कि बिहार में जंगल राज चल रहा है और यह केवल बिहार का ही नहीं, बल्कि पूरे देश का सवाल है। वाजपेयी सरकार के दौरान, राज्य में अपराधियों को संरक्षण देने और संस्थाओं को कमजोर करने के आरोप लगते रहे।
नीतीश कुमार ने सत्ता संभालते ही सबसे पहले कानून व्यवस्था को सुदृढ़ करने पर ध्यान केंद्रित किया। उन्होंने फास्ट-ट्रैक कोर्ट की स्थापना करवाई, जिसके परिणामस्वरूप 2005 से 2010 के बीच एक लाख से अधिक अपराधियों को सजा सुनाई गई, जबकि इससे पूर्व के 15 वर्षों में यह आंकड़ा केवल 20,000 था। पुलिस बल को दोगुना करने के लिए लगभग 70,000 नए कर्मचारियों की भर्ती की गई। इसके साथ ही, पुलिस के हथियारों को उन्नत किया गया, उनके वेतनमान में वृद्धि की गई और राज्य भर में 1,000 से अधिक नए पुलिस स्टेशन स्थापित किए गए, जिससे पुलिसिंग व्यवस्था में एक क्रांतिकारी बदलाव आया।
कानून व्यवस्था के अलावा, नीतीश कुमार ने शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के सुधार पर भी जोर दिया। स्कूलों में नामांकन दर बढ़ी, और स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच में सुधार हुआ। भ्रष्टाचार के विरुद्ध कड़े कदम उठाए गए और सामाजिक सुधारों, जैसे दहेज विरोधी अभियान और नशामुक्ति आंदोलन, को महत्वपूर्ण समर्थन दिया गया। इन प्रयासों ने बिहार में एक सकारात्मक सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन की नींव रखी, जिसने जनता के विश्वास को और मजबूत किया। हालिया विधानसभा चुनावों में एनडीए गठबंधन की शानदार जीत, जहाँ उन्हें 202 सीटें मिलीं, नीतीश कुमार के नेतृत्व में राज्य की जनता के अटूट विश्वास को दर्शाता है। यह जीत साबित करती है कि 2005 से बिहार की जनता का नीतीश कुमार पर भरोसा अब भी बरकरार है।
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