निरहुआ का बयान: बिहार में एनडीए की जीत विकास की, यूपी में अखिलेश का होगा खेसारी जैसा हाल
आजमगढ़: पूर्व सांसद दिनेश लाल यादव उर्फ निरहुआ ने सोमवार को आजमगढ़ पहुंचकर प्रसिद्ध भंवरनाथ मंदिर में दर्शन पूजन किया। इस दौरान पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने उनका भव्य स्वागत किया। मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए की जीत का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के विकास कार्यों को दिया।
निरहुआ ने विपक्ष द्वारा लगाए जा रहे ईवीएम हैकिंग और वोट चोरी के आरोपों पर पलटवार करते हुए कहा, “अगर ईवीएम हैक होती तो आजमगढ़ से हम भी चुनाव जीत जाते।” उन्होंने कहा कि विपक्ष जब भी चुनाव हारता है तो इस तरह के बेबुनियाद आरोप लगाता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि एनडीए की जीत जनता के भरोसे और सरकार द्वारा किए गए विकास कार्यों का प्रमाण है।
उत्तर प्रदेश की राजनीति पर बोलते हुए, निरहुआ ने पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, “बिहार में खेसारी लाल यादव का जो हश्र हुआ है, वही हश्र उत्तर प्रदेश में पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का होगा।” उन्होंने खेसारी लाल यादव और अखिलेश यादव की तुलना करते हुए कहा कि जिस तरह से खेसारी लाल यादव ने बिहार चुनाव में राम मंदिर पर विवादास्पद टिप्पणी की, उसी तरह अखिलेश यादव भी मंदिर और सनातन धर्म पर टिप्पणी करते हैं, जिसे जनता पसंद नहीं करती।
आजमगढ़ के विकास को लेकर उन्होंने कहा कि जल्द ही आजमगढ़ से दिल्ली के लिए एक नई ट्रेन शुरू होगी, जिसके लिए उन्होंने रेल मंत्री से बातचीत की है। साथ ही, वाराणसी से गोरखपुर वाया आजमगढ़ रेल लाइन का काम भी आगे बढ़ा है और रिंग रोड का काम भी जल्द शुरू होने जा रहा है। उन्होंने विश्वास दिलाया कि वे आजमगढ़ के विकास के लिए सदैव तत्पर हैं।
लालू प्रसाद यादव के परिवार में चल रही कलह पर उन्होंने दुख व्यक्त किया। रोहिणी आचार्य के घर छोड़ने की घटना को दुखद बताते हुए उन्होंने कहा कि परिवार से बड़ा कुछ नहीं होता। तेजस्वी यादव का नाम लिए बगैर उन्होंने सवाल उठाया कि जब परिवार ही साथ नहीं है तो राजनीति करने का क्या मतलब है। उन्होंने कहा कि वे लालू परिवार के करीबी हैं और उनसे आशीर्वाद लेते रहते हैं।
निरहुआ ने यह भी कहा कि खेसारी लाल यादव अब राजनीति में आ गए हैं तो उन्हें जनता की सेवा करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि बिहार की जनता गुंडाराज नहीं चाहती थी और राजद के लोग चुनाव जीतने से पहले ही गुंडागर्दी की बात करने लगे थे, जिसे जनता ने पसंद नहीं किया।
