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नैनीताल: नगर पालिका के टोल और पार्किंग पर ‘बाहरी’ राज! लाखों के CCTV ठप, आखिर चल क्या रहा है?

By Dec 8, 2025

नैनीताल में नगर पालिका द्वारा संचालित टोल और पार्किंग स्थलों पर ‘बाहरी लोगों’ के कथित कब्जे ने शहर में एक बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि इन महत्वपूर्ण स्थानों का संचालन बाहरी लोग कर रहे हैं, जिससे न केवल उनके अपने रोजगार के अवसर कम हो रहे हैं, बल्कि पूरी व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। शहर की सुरक्षा के लिए लगाए गए लाखों रुपये के सीसीटीवी कैमरे भी महीनों से ठप पड़े हैं, जिससे अपराध बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

नगर पालिका ने वित्तीय संकट से निपटने के लिए पार्किंग और टोल शुल्क में बढ़ोतरी तो की, लेकिन इन बूथों पर चल रहे ‘खेल’ से वह बेखबर दिख रही है। महीनों से टोल और पार्किंग स्थल नगर पालिका कर्मियों के बजाय बाहरी लोगों द्वारा चलाए जा रहे हैं। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि क्या नगर पालिका कर्मचारियों ने इन जगहों पर काम करने के लिए अपने व्यक्तिगत कर्मचारी रख लिए हैं। इससे भी अधिक चिंताजनक बात यह है कि टोल और पार्किंग स्थलों पर गड़बड़ी पर नजर रखने के लिए लाखों की लागत से लगाए गए सीसीटीवी कैमरे भी जून माह से ठप पड़े हैं, जो अब सिर्फ शोपीस बन कर रह गए हैं।

अप्रैल में हाईकोर्ट ने नगर पालिका को शहर के पार्किंग स्थल और टैक्सी टोल चुंगी का संचालन स्वयं करने का निर्देश दिया था। इन निर्देशों के बाद पालिका ने पार्किंग शुल्क बढ़ाकर 500 रुपये और टोल शुल्क 300 रुपये प्रति वाहन कर दिया था और अपने कर्मचारी नियुक्त किए थे। कर्मियों की कमी होने पर स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को भी नियुक्त किया गया। पालिका का दावा था कि शुल्क बढ़ोतरी से उसकी वित्तीय हालत सुधरेगी, लेकिन कुछ ही महीनों में बाहरी लोगों ने पालिका की आय पर कथित तौर पर कब्जा जमा लिया। बारापत्थर, तल्लीताल लेक ब्रिज, फांसी गधेरा टोल और विभिन्न पार्किंग स्थलों पर बाहरी लोग पालिका कर्मियों के साथ खड़े होकर टोल काटने और शुल्क वसूलने का काम कर रहे हैं, जबकि नगर पालिका के अधिकारी इस सबसे अनजान बने हुए हैं।

पार्किंग और टोल का संचालन नगर पालिका के हाथ में आने के बाद वहां ड्यूटी देने वाले कर्मियों में होड़ सी मच गई थी। बाहरी लोगों के इन स्थलों पर ड्यूटी करने से पालिका की निगरानी और व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। आठ-आठ घंटे के अंतराल में बाहरी युवक टोल और पार्किंग में ड्यूटी करने आते हैं, जिनकी आउटसोर्स से नियुक्ति किए जाने से पालिका के अधिकारी इनकार कर रहे हैं। ऐसे में यह सवाल उठता है कि क्या इन स्थलों पर तैनात कर्मचारियों ने ही अपने निजी कर्मचारी रख लिए हैं? यदि ऐसा है, तो क्या इन कर्मियों को मिलने वाला मानदेय पालिका की आमदनी से काटकर दिया जा रहा है?

हाईकोर्ट ने शुल्क बढ़ोतरी के बाद सभी पार्किंग और टोल पर फास्ट टैग की तरह शुल्क वसूली का सिस्टम ऑनलाइन करने के निर्देश दिए थे, लेकिन अधिकारियों ने कोर्ट के आदेशों को भी भुला दिया है। टोल और पार्किंग स्थलों पर मोबाइल नेटवर्क न होने का बहाना बनाकर अब भी नकद शुल्क ही वसूला जा रहा है।

इस मामले पर नगर पालिका नैनीताल के ईओ रोहिताश शर्मा ने कहा कि पार्किंग व टोल में आउटसोर्स से कोई नियुक्ति नहीं की गई है। उन्होंने बताया कि इंटरनेट का बिल अदा न करने के कारण सीसीटीवी ठप पड़े हैं और बिल जमा करने के बाद उन्हें सुचारु करवा दिया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि यदि पार्किंग व टोल में बाहरी व्यक्ति कार्य कर रहे हैं, तो इसकी जांच की जाएगी। हालांकि, इन बयानों के बावजूद जमीनी हकीकत कई सवाल खड़े कर रही है।

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