नेशनल हेराल्ड मामला: 11 साल बाद भी आरोप पत्र पर संज्ञान का इंतजार
नेशनल हेराल्ड हाउस की करोड़ों की संपत्ति से जुड़े बहुचर्चित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में 11 साल बीत जाने के बाद भी आरोप पत्र पर संज्ञान लेने का इंतजार जारी है। 2012 में पूर्व राज्यसभा सदस्य सुब्रमण्यम स्वामी द्वारा दायर एक निजी शिकायत से शुरू हुआ यह मामला कानूनी दांव-पेंच में उलझकर रह गया है। स्थिति यह है कि 11 साल से लंबित इस मामले में ट्रायल शुरू होना तो दूर, अभी तक दाखिल आरोप पत्र को स्वीकार करने के पहलू पर ही अदालत में सुनवाई अटकी हुई है। इस बीच, विभिन्न कानूनी मुद्दों को लेकर मामला उच्च न्यायालय से लेकर सर्वोच्च न्यायालय तक पहुंचा है।
इस मामले की शुरुआत जून 2014 में हुई, जब पटियाला हाउस कोर्ट के मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट ने सुब्रमण्यम स्वामी की 2012 की शिकायत पर संज्ञान लिया और कांग्रेस नेताओं सोनिया गांधी, राहुल गांधी सहित अन्य के खिलाफ समन जारी किया। इसके तुरंत बाद, अगस्त 2014 में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया। 19 दिसंबर 2015 को पटियाला कोर्ट ने सोनिया गांधी और राहुल गांधी समेत अन्य आरोपितों को नियमित जमानत दे दी थी।
मामले में आगे बढ़ते हुए 2016 में बचाव पक्ष ने ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही रद्द करने की मांग को लेकर सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया, लेकिन शीर्ष अदालत ने राहत देने से इनकार कर दिया। हालांकि, सभी आरोपितों को व्यक्तिगत पेशी से छूट जरूर मिल गई। इसके पश्चात, 2018 में दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोनिया और राहुल गांधी की आयकर विभाग के नोटिस के खिलाफ दायर याचिका को भी खारिज कर दिया। उच्च न्यायालय के इस फैसले को चुनौती देने वाली कांग्रेसियों की याचिका को सर्वोच्च न्यायालय ने भी खारिज करते हुए कहा कि आयकर विभाग की जांच जारी रहेगी।
उच्च न्यायालय से लेकर सर्वोच्च न्यायालय तक चली कानूनी जिरह के बीच, ईडी ने 2021 में मामले की जांच में तेजी लाई। करीब चार साल की जांच के बाद, 15 अप्रैल 2025 को ईडी ने कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी, राहुल गांधी और अन्य आरोपितों के खिलाफ गंभीर आरोप लगाते हुए राउज एवेन्यू की विशेष अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया।
25 अप्रैल को आरोप पत्र पर संज्ञान लेने के बिंदु पर सुनवाई करते हुए, पटियाला हाउस की विशेष अदालत ने सोनिया गांधी और राहुल गांधी को नोटिस जारी करने से यह कहते हुए इनकार कर दिया था कि आरोपितों का पक्ष सुने बिना नोटिस जारी नहीं किया जा सकता। अदालत ने ईडी को संबंधित दस्तावेज दाखिल करने का आदेश देते हुए सुनवाई दो मई तक स्थगित कर दी थी। दो मई को अदालत ने सोनिया गांधी और राहुल गांधी को नोटिस जारी किया, जिसमें कहा गया कि किसी भी स्तर पर सुने जाने का अधिकार एक पारदर्शी ट्रायल के लिए आवश्यक है। आठ मई को होने वाली सुनवाई को 21 मई के लिए टाल दिया गया।
21 मई को अदालत ने ईडी द्वारा दाखिल किए गए आरोप पत्र पर जिरह सुनना शुरू किया। ईडी ने तर्क दिया कि प्रथम दृष्टया राहुल गांधी और सोनिया गांधी के खिलाफ मामला बनता है। अदालत ने ईडी और अभियुक्तों की ओर से दो जुलाई से आठ जुलाई तक प्रतिदिन जिरह सुनने का निर्णय लिया। चार जुलाई को सोनिया गांधी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता ने इस मामले को ‘बिना किसी जुर्म के संपत्ति के इस्तेमाल से जुड़ा मनी लॉन्ड्रिंग मुकदमा’ बताते हुए ईडी के केस पर ही सवाल उठाए। वहीं, आठ जुलाई को ईडी ने सोनिया गांधी, राहुल गांधी और अन्य आरोपितों पर मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप पुष्ट करने का प्रयास किया।
पूरे मामले में 11 साल बाद भी आरोप पत्र पर संज्ञान का इंतजार न्याय प्रक्रिया की धीमी गति को दर्शाता है, और अब सभी की निगाहें 17 दिसंबर को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं।
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