नेपाल में जेन-जेड आंदोलन के बाद बढ़ा मानव तस्करी का खतरा, युवा रोजगार की तलाश में भटकने को मजबूर
नेपाल में हाल ही में हुए जेन-जेड आंदोलन के पश्चात उत्पन्न हुई राजनीतिक अस्थिरता और आर्थिक मंदी ने देश के युवाओं के लिए रोजगार के अवसर गंभीर रूप से सीमित कर दिए हैं। उद्योग और पर्यटन जैसे प्रमुख व्यावसायिक क्षेत्रों पर पड़े नकारात्मक प्रभाव के कारण, बड़ी संख्या में युवा हताश और निराश हैं। इसी हताशा का फायदा उठाते हुए, मानव तस्करों ने अपनी गतिविधियों को तेज कर दिया है। भारत और नेपाल के बीच खुली सीमा, जो सदियों से सांस्कृतिक और व्यावसायिक आदान-प्रदान का माध्यम रही है, अब मानव तस्करी जैसे गंभीर अपराधों के लिए एक सुविधाजनक मार्ग बन गई है।
सूत्रों के अनुसार, नेपाल के 27 जिलों में फैले मानव तस्कर गिरोहों ने अपना जाल बिछा रखा है। ये गिरोह विशेष रूप से नेपाली युवतियों को निशाना बना रहे हैं। उन्हें भारत और खाड़ी देशों में अच्छी नौकरी का सब्जबाग दिखाकर, तस्कर उन्हें आसानी से भारतीय सीमा में प्रवेश करा देते हैं। एक बार सीमा पार करने के बाद, इन युवतियों को अक्सर शोषण का शिकार होना पड़ता है। महराजगंज और गोरखपुर जैसे क्षेत्रों में, जहाँ पुलिस की निगरानी अपेक्षाकृत अधिक है, तस्कर युवतियों को परतावल और पिपराइच जैसे मार्गों से गोरखपुर ले जाने का प्रयास करते हैं।
हाल के दो महीनों में मानव तस्करी से जुड़े 10 से अधिक मामले सामने आए हैं। इन मामलों में, सीमा पर तैनात सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) और पुलिस की टीमें सक्रियता से काम कर रही हैं। कई मामलों में, एसएसबी और पुलिस ने नेपाली युवतियों को तस्करों के चंगुल से छुड़ाया और उन्हें समझा-बुझाकर उनके परिवारों के पास वापस भेजा है। हालांकि, कुछ गंभीर मामलों में मुकदमा दर्ज कर कानूनी कार्रवाई भी की गई है। एंटी ह्यूमेन ट्रैफिकिंग यूनिट (एएसटीयू) ने भी बीते दो महीनों में दो मामले दर्ज किए हैं।
एक हालिया घटना में, 26 नवंबर को एसएसबी ने झुलनीपुर के पास तीन किशोरियों को पकड़ा था। पूछताछ में पता चला कि उन्हें नौकरी दिलाने का लालच देकर भारत लाया गया था। यहाँ निचलौल स्थित आर्केस्टा में उनसे डांस करवाया गया और उनका शारीरिक शोषण किया गया। किशोरियों ने निचलौल निवासी शाहरुख अली और उसके साथियों विशाल व छोटू पर दो महीने से उनका शारीरिक शोषण कर धन कमाने का आरोप लगाया है। ये किशोरियां नेपाल के रुपंदेही, रोलपा और दांग जिलों की रहने वाली बताई गई हैं।
एसएसबी की 22वीं वाहिनी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि सीमा पर मानव तस्करी को रोकने के लिए लगातार निगरानी और सतर्कता बरती जा रही है। नेपाल की आर्थिक स्थिति भी इस समस्या को बढ़ा रही है। देश की लगभग 18 प्रतिशत आबादी अभी भी गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन कर रही है। कृषि, पर्यटन और विदेश से आने वाला धन (रेमिटेंस) नेपाल की अर्थव्यवस्था के मुख्य आधार हैं, जिसमें विदेश में काम करने वाले नेपाली नागरिकों द्वारा भेजा गया धन सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का लगभग 25 प्रतिशत है। आर्थिक अस्थिरता और रोजगार की कमी युवाओं को ऐसे जोखिम भरे रास्तों पर धकेल रही है।
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