नेपाल में चुनाव पूर्व गरमाई सियासत, भारत सीमा पर बढ़ी चौकसी
नेपाल में आसन्न चुनावों को लेकर राजनीतिक पारा चढ़ गया है। विभिन्न राजनीतिक दल अपनी रणनीतियों को अंतिम रूप देने में जुटे हुए हैं, जबकि भारत-नेपाल सीमा पर सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं। नेपाल सरकार मतदान के दौरान शांतिपूर्ण माहौल बनाए रखने के लिए लगातार संयुक्त बैठकें आयोजित कर रही है।
इस बीच, पूर्व नरेश ज्ञानेंद्र शाह की संभावित वापसी की अटकलें राजनीतिक बहसों को और हवा दे रही हैं, जिससे राजशाही की आहट महसूस की जा रही है। देश में पिछले 17 वर्षों से जारी राजनीतिक अस्थिरता और गंभीर आर्थिक चुनौतियों ने आम जनता के बीच गहरी निराशा पैदा की है। आर्थिक मंदी और बेरोजगारी जैसे मुद्दे चुनावों के प्रमुख एजेंडे बने हुए हैं, जिन पर विभिन्न दलों की नीतियां जनता के लिए निर्णायक साबित होंगी।
नेपाल की आठ राजनीतिक पार्टियों ने संसद भंग करने की कार्रवाई की कड़ी निंदा करते हुए एक संयुक्त बयान जारी किया है। उन्होंने इस कदम को संविधान के विरुद्ध बताते हुए कहा है कि यह लोकतांत्रिक जनादेश को कमजोर करता है।
एक एमाले नेता के अनुसार, “जेन्जी आंदोलन को विदेशी शक्तियों का समर्थन मिला और कार्यवाहक सुशीला कार्की सरकार द्वारा चुनाव तिथि घोषित किया जाना स्थिरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उनका मानना है कि चुनाव समय पर होना ही सरकार की सफलता का परिचायक होगा।”
प्रगतिशील पार्टी के नेता ईश्वर दयाल मिश्र ने कहा, “गणतांत्रिक व्यवस्था के विरुद्ध किसी भी गतिविधि को स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने शांतिपूर्ण आंदोलन को ही लोकतांत्रिक मार्ग बताया और कहा कि ओली सरकार में भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन करना उचित था। सरकार को जल्द से जल्द निष्पक्ष चुनाव कराने चाहिए।”
राष्ट्रीय मुक्ति पार्टी के रवि मिश्रा ने कहा कि नेपाल की प्राथमिक आवश्यकता राजनीतिक स्थिरता और निष्पक्ष चुनाव हैं। उनके अनुसार, निष्पक्ष चुनाव से ही लोकतंत्र को मजबूती मिलेगी।
गौरतलब है कि नेपाल में आम चुनावों के दौरान सेना की तैनाती की सिफारिश की गई है और कई संवेदनशील इलाकों से कर्फ्यू हटा लिया गया है। नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) ने चुनाव आयोग में अपना पंजीकरण कराया है और चुनाव चिन्ह के रूप में लाल गुलाब प्राप्त किया है। नेपाल में आम चुनाव का कार्यक्रम जारी कर दिया गया है, जिसमें 20 जनवरी को नामांकन और 5 मार्च को मतदान होना है। इससे पहले, नेपाल में आम चुनावों से पहले 10 वामपंथी दलों ने मिलकर एक नई पार्टी का गठन किया है, जिसका उद्देश्य भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद को चुनौती देना है।
बरेली में आवारा कुत्तों का आतंक: दूध कारोबारी पर हमला, नगर निगम की लापरवाही पर सवाल
पत्नी को मायके छोड़ने के बाद युवक का पंखे से लटका मिला शव, रहस्य गहराया
अयोध्या-प्रयागराज मार्ग पर रूट डायवर्जन, पीएम मोदी के दौरे के कारण यातायात प्रभावित
मतदाता सूची पुनरीक्षण में बीएलओ परेशान, अधूरे प्रपत्रों से काम रुका
अयोध्या ध्वजारोहण: कानपुर-लखनऊ हाईवे पर दो दिन भारी वाहनों का डायवर्जन
डीजे पर डांस विवाद में छात्र की गला दबाकर हत्या, शरीर पर मिले सात घाव
कैब चालक ने खोला सौरभ हत्याकांड का राज: 14 दिन के टूर पर मुस्कान-साहिल की मौज-मस्ती
बाल अधिकार सप्ताह: वंचित बच्चों को मिला अधिकारों और शिक्षा का उजाला
