यूपी विधानसभा में मंत्री-विधायक की नोकझोंक, ऊर्जा मंत्री ने दी बिजली दरों पर राहत की जानकारी | UP Assembly news
उत्तर प्रदेश विधानसभा के गुरुवार के प्रश्न प्रहर में राज्य की राजनीति और जनहित से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दे उठे। इस दौरान कृषि विपणन मंत्री दिनेश प्रताप सिंह और समाजवादी पार्टी की सदस्य डॉ. रागिनी सोनकर के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली, वहीं ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने प्रदेश में बिजली आपूर्ति और दरों को लेकर सरकार की उपलब्धियां गिनाईं। यह सत्र राज्य के कृषि मंडियों में व्याप्त कथित भ्रष्टाचार और बिजली उपभोक्ताओं को मिल रही सुविधाओं पर केंद्रित रहा, जिसका सीधा असर आम जनता पर पड़ता है।
प्रश्न प्रहर के दौरान डॉ. रागिनी सोनकर ने मंडी परिसर में सड़कों के रखरखाव का मुद्दा उठाया। उन्होंने विशेष रूप से वाराणसी की मंडी में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया। डॉ. सोनकर के अनुसार, 12 लाख रुपये की सड़क के निर्माण के लिए करोड़ों रुपये स्वीकृत किए गए, जबकि 4 लाख की टाइल्स लगाने के लिए 34 लाख रुपये खर्च किए गए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि ब्लैकलिस्ट की गई कंपनी को ही दोबारा काम दिया गया। उन्होंने नींबू-प्याज के किसानों पर उत्तर प्रदेश में नया कर लगाने का मुद्दा भी उठाया, जो अन्य राज्यों में नहीं है।
डॉ. सोनकर के आरोपों पर कृषि विपणन मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने जवाब देना शुरू किया और कहा कि डॉ. रागिनी सोनकर तो पूरे सदन को ही ‘हाईजैक’ कर लेती हैं। उन्होंने बताया कि उन्होंने खुद डॉ. सोनकर के क्षेत्र मछलीशहर में किए गए विकास कार्यों का पूरा ब्योरा उनके मोबाइल पर भेजा है। मंत्री ने यह भी दावा किया कि उन्होंने प्रदेश के 403 में से 364 विधायकों के क्षेत्रों में काम कराया है। उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना का नाम लेते हुए कहा कि उन्होंने उनके क्षेत्र में भी काम कराया है, जिस पर अध्यक्ष ने आपत्ति जताते हुए कहा कि मंत्री होने के नाते यह उनका कर्तव्य है।
इसी विधानसभा सत्र में ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने बिजली निजीकरण और स्मार्ट मीटर के मुद्दे पर सपा सदस्यों द्वारा उठाए गए सवालों का जवाब दिया। ऊर्जा मंत्री ने बताया कि उत्तर प्रदेश पिछले छह सालों से बिजली दरें न बढ़ाने वाला देश का पहला राज्य है। उन्होंने दावा किया कि प्रदेश के लोगों को आज 24 घंटे बिजली मिल रही है और अयोध्या को ‘सोलर सिटी’ के रूप में विकसित किया जा रहा है, साथ ही सोलर ग्रिड बनाने की भी तैयारी है।
मंत्री शर्मा ने आगे बताया कि घरेलू उपभोक्ताओं का टैरिफ देश के अन्य राज्यों से कम है और प्रति व्यक्ति बिजली की खपत 724 यूनिट है। उन्होंने कहा कि पहले अधिकतम बिजली की मांग 12 हजार मेगावाट होती थी, जो अब 31 हजार मेगावाट आपूर्ति का आंकड़ा पार कर गई है। उन्होंने विद्युत वितरण कंपनियों की रेटिंग में सुधार और देशस्तर पर उत्पादन तथा ट्रांसमिशन में अवार्ड मिलने का भी जिक्र किया। सौर ऊर्जा का उत्पादन 28 हजार मेगावाट हो रहा है और 45 लाख से अधिक उपभोक्ताओं ने राहत योजना का लाभ उठाया है, जिससे निगमों को आठ हजार करोड़ से अधिक का राजस्व मिला है। उन्होंने शिकायतों को कम करने के लिए प्रौद्योगिकी के उपयोग पर भी जोर दिया।
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