उत्तर प्रदेश में मातृ-शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को मिलेगी मजबूती, जटिल प्रसव में तत्काल विशेषज्ञ सुविधा: UP health news
उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए एक बड़ा अभियान शुरू किया है। इसके तहत आपातकालीन प्रसव सेवाओं को सुदृढ़ करते हुए फर्स्ट रेफरल यूनिट (एफआरयू) की संख्या 153 से बढ़ाकर 427 कर दी गई है। इस विस्तार से जटिल प्रसव मामलों में समय पर विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधा उपलब्ध हो सकेगी, जिससे माताओं और नवजात शिशुओं के जीवन को बचाया जा सकेगा। यह कदम प्रदेश भर के लाखों परिवारों के लिए एक बड़ी राहत लेकर आएगा।
राज्य में मातृ एवं नवजात मृत्यु दर में कमी लाने के उद्देश्य से हाल ही में राज्य टास्क फोर्स की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग के अपर मुख्य सचिव अमित कुमार घोष ने बताया कि गुणवत्तापूर्ण प्रसव देखभाल पर ध्यान केंद्रित करके लगभग 46 प्रतिशत मातृ मृत्यु, 40 प्रतिशत नवजात मृत्यु और 40 प्रतिशत मृत जन्म को रोका जा सकता है। इसके साथ ही, गंभीर रूप से बीमार शिशुओं की बेहतर देखभाल से लगभग 30 प्रतिशत मौतों को टाला जा सकता है, जबकि घर पर नवजात शिशुओं की नियमित देखभाल से 25 से 30 प्रतिशत तक मृत्यु दर में कमी लाई जा सकती है।
मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में सुधार की स्थिति
सैंपल रजिस्ट्रेशन सर्वे 2023 के आंकड़ों के अनुसार, वर्तमान में प्रदेश में मातृ मृत्यु दर प्रति एक लाख पर 141, नवजात मृत्यु दर प्रति एक हजार पर 26 और शिशु मृत्यु दर प्रति एक हजार पर 37 है। इन आंकड़ों में सुधार लाने के लिए सरकार ने कई अहम निर्णय लिए हैं। अब हर तीन महीने में सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे, जिनमें अच्छा काम करने वाले स्वास्थ्य कर्मियों को सम्मानित कर उनके अनुभवों से दूसरों को सीखने का अवसर मिलेगा।
विशेषज्ञ इकाइयों का विस्तार और नई पहल
बैठक में बाल स्वास्थ्य महाप्रबंधक डा. मिलिंद वर्धन और अपर निदेशक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण डा. अजय गुप्ता ने नवजात शिशुओं की बेहतर देखभाल के लिए विशेष नवजात देखभाल इकाइयों (एसएनसीयू) और न्यूबॉर्न स्टेबिलाइजेशन यूनिट (एनबीएसयू) सेवाओं के विस्तार पर जोर दिया। प्रीमैच्योर बच्चों के इलाज के लिए सीपीएपी सुविधा बढ़ाने और इन इकाइयों में 24 घंटे जांच सेवाएं उपलब्ध कराने के भी निर्देश दिए गए हैं। इसके अतिरिक्त, ‘मदर एंड न्यूबॉर्न केयर यूनिट’ (एमएनसीयू) मॉडल को बढ़ावा देने पर भी सहमति बनी है, जिससे जन्म के बाद मां और बच्चे को अलग न रखते हुए संयुक्त देखभाल प्रदान की जा सकेगी। इन प्रयासों से UP health news में सकारात्मक बदलाव की उम्मीद है।
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