आईवीएफ के 40% मामलों में पुरुष बांझपन की समस्या, जानें कारण
संतान सुख से वंचित दंपतियों के मामलों में अब सिर्फ महिलाओं पर ही सवाल नहीं उठते, बल्कि चिकित्सा विज्ञान ने यह स्पष्ट कर दिया है कि आईवीएफ (इन विट्रो फर्टिलाइजेशन) के लगभग 40% मामलों में पुरुष बांझपन एक अहम कारण है। पुरुषों में स्पर्म काउंट, स्पर्म की गति और गुणवत्ता से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ी हैं, जिससे प्राकृतिक गर्भधारण की संभावना कम हो जाती है।
आईवीएफ विशेषज्ञ बताते हैं कि पुरुषों की प्रजनन क्षमता को प्रभावित करने वाले मुख्य कारकों में बदलती जीवनशैली शामिल है। लगातार तनाव, मोटापा, धूम्रपान, शराब का सेवन, जंक फूड, व्यायाम की कमी, देर रात तक जागना, मधुमेह, हार्मोनल गड़बड़ी और बढ़ती उम्र पुरुषों की प्रजनन क्षमता पर नकारात्मक प्रभाव डाल रहे हैं। यही कारण है कि अब आईवीएफ जैसी तकनीकों का सहारा लेने वाले दंपतियों में पुरुषों की समस्या का निदान आम हो गया है।
प्रजनन विशेषज्ञ डॉ. प्रतिभा सिंह के अनुसार, शादी के एक साल बाद भी गर्भधारण न होने पर पुरुष और महिला दोनों की फर्टिलिटी जांच कराना आवश्यक है। बांझपन एक चिकित्सा समस्या है, जिसे सामाजिक कलंक नहीं माना जाना चाहिए। समय पर जांच, सही परामर्श और आधुनिक प्रजनन तकनीकों की मदद से अधिकांश दंपतियों के लिए सफल उपचार संभव है। आईवीएफ की सफलता दर अब अत्याधुनिक तकनीक, बेहतर भ्रूण चयन और उन्नत लैब सुविधाओं के कारण काफी बेहतर हुई है।
जीवनशैली में बदलाव और आधुनिक चिकित्सा के सकारात्मक परिणाम कई दंपतियों के जीवन में खुशियां लेकर आए हैं। ऐसे मामलों में जहां पहले महिलाओं पर ही जांच का दबाव होता था, वहीं अब दोनों साथियों की एक साथ जांच की सलाह दी जाती है।
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