महाराष्ट्र में सत्ता का खेल: फडणवीस-शिंदे के बीच निकाय चुनाव को लेकर बढ़ी तनातनी
महाराष्ट्र में भारतीय जनता पार्टी, एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना और अजीत पवार के नेतृत्व वाली राकांपा की गठबंधन सरकार में निकाय चुनावों की घोषणा के साथ ही आंतरिक खींचतान तेज हो गई है। विशेष रूप से, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के बीच सार्वजनिक मंचों पर भी तनाव स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है।
पिछला लोकसभा चुनाव और उसके बाद विधानसभा चुनाव इन तीनों दलों ने मिलकर लड़ा था। हालांकि लोकसभा चुनाव में उन्हें अपेक्षित सफलता नहीं मिली, लेकिन विधानसभा चुनाव में अच्छी जीत हासिल कर उन्होंने सरकार बनाई। सरकार सुचारू रूप से चल रही थी, लेकिन स्थानीय निकायों के चुनाव घोषित होते ही सत्तारूढ़ दलों के बीच वर्चस्व की लड़ाई शुरू हो गई है। सभी दलों के कार्यकर्ता इन छोटे चुनावों में अपनी किस्मत आजमाना चाहते हैं, जिसका दबाव नेताओं पर भी पड़ रहा है।
इस राजनीतिक माहौल में, टिकट पाने या जीत की संभावनाओं को देखते हुए कार्यकर्ताओं का दल-बदलना आम बात हो गई है। हाल ही में, भाजपा से शिवसेना में और फिर शिवसेना से भाजपा में कार्यकर्ताओं के शामिल होने की घटनाएं देखी गईं। उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के गृह जिले ठाणे के कुछ कार्यकर्ताओं के भाजपा में शामिल होने के विरोध में, शिंदे गुट के कई मंत्रियों ने पिछले मंगलवार को हुई मंत्रिमंडल की बैठक का बहिष्कार कर दिया।
हालांकि उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे बैठक में मौजूद थे, लेकिन उनके चेहरे पर तनाव साफ झलक रहा था। यह तनाव विभिन्न सार्वजनिक मंचों पर भी देखा गया। उदाहरण के लिए, एक सार्वजनिक समारोह में शामिल होने के लिए देवेंद्र फडणवीस और अजीत पवार एक ही विमान से गए, जबकि एकनाथ शिंदे दूसरे विमान से पहुंचे और उन्होंने फडणवीस से दूरी बनाए रखी। कई अन्य सार्वजनिक कार्यक्रमों में भी दोनों नेताओं को एक-दूसरे से नजरें चुराते देखा गया है।
इस बीच, शिंदे ने दिल्ली जाकर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात की। इस मुलाकात पर शिवसेना (यूबीटी) के अध्यक्ष उद्धव ठाकरे ने तंज कसते हुए कहा कि शिंदे बार-बार दिल्ली जाकर शिकायत कर रहे हैं, जैसे कोई बच्चा अपने पिता से शिकायत कर रहा हो।
सूत्रों के अनुसार, एकनाथ शिंदे, जो पहले भाजपा के समर्थन से ढाई साल मुख्यमंत्री रह चुके हैं, इस सरकार में उपमुख्यमंत्री पद से संतुष्ट नहीं हैं। दूसरी ओर, फडणवीस ने भी शिंदे की घेराबंदी करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। उन्होंने शिंदे के गृह जिले ठाणे से ही भाजपा के एक कद्दावर नेता रवींद्र चव्हाण को भाजपा का प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त करवाया है। चव्हाण, डोंबीवली विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं, जो शिंदे के पुत्र श्रीकांत शिंदे के संसदीय क्षेत्र का हिस्सा है।
इसके अतिरिक्त, ठाणे के एक अन्य प्रभावशाली नेता गणेश नाईक भी फडणवीस मंत्रिमंडल में कैबिनेट मंत्री हैं और उन्हें ठाणे में भाजपा के संगठन विस्तार की विशेष जिम्मेदारी दी गई है। वे अक्सर ठाणे में संगठन की बड़ी बैठकें आयोजित करते हैं, जो शिंदे को पसंद नहीं आ रहा है। शिंदे मुंबई और ठाणे में उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) के जनाधार को पूरी तरह से अपने पाले में लाना चाहते हैं, जबकि फडणवीस भाजपा की सांगठनिक क्षमता बढ़ाकर मुंबई और ठाणे दोनों महानगरपालिकाओं में अपना मेयर बनाने की जुगत में हैं। यह टकराव शिंदे और फडणवीस के बीच की दूरी को बढ़ा रहा है।
