मेटा के ‘ड्रीम प्रोजेक्ट’ पर बड़ी कटौती: जुकरबर्ग का अहम फैसला, बजट में भारी कमी
मेटा के संस्थापक और सीईओ मार्क जुकरबर्ग ने कंपनी के सबसे महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट, मेटावर्स, के बजट में बड़ी कटौती करने का फैसला किया है। यह वही प्रोजेक्ट है जिसे कभी कंपनी का भविष्य बताया गया था और जिसके लिए फेसबुक का नाम बदलकर मेटा किया गया था। सूत्रों के अनुसार, अगले साल मेटावर्स से जुड़े डिवीजनों के बजट में 30% तक की कटौती की जा सकती है।
यह कटौती मेटा की 2026 की वार्षिक बजट योजना का हिस्सा है। आमतौर पर, जुकरबर्ग सभी विभागों से 10% की कटौती की मांग करते हैं, लेकिन इस बार मेटावर्स डिवीजन से अधिक कटौती की उम्मीद है। इसका मुख्य कारण यह बताया जा रहा है कि कंपनी को इस तकनीक में अपेक्षित बाजार प्रतिक्रिया या प्रतिस्पर्धा दिखाई नहीं दे रही है। सबसे ज्यादा असर वर्चुअल रियलिटी (VR) ग्रुप पर पड़ने की संभावना है, क्योंकि मेटावर्स पर होने वाला अधिकांश खर्च इसी पर केंद्रित है।
बजट कटौती के साथ-साथ, जनवरी से छंटनी की भी आशंका जताई जा रही है, हालांकि इस पर अभी अंतिम फैसला नहीं लिया गया है। मेटा का पूरा मेटावर्स प्रयास ‘रियलिटी लैब्स’ डिवीजन के तहत आता है, जो VR हेडसेट्स और AR ग्लासेज जैसे हार्डवेयर पर काम करता है। 2021 की शुरुआत से अब तक इस डिवीजन को 70 बिलियन डॉलर से अधिक का नुकसान हो चुका है।
सूत्रों का कहना है कि मार्क जुकरबर्ग अब सार्वजनिक रूप से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर अधिक ध्यान केंद्रित कर रहे हैं और हाल की अर्निंग कॉल्स में मेटावर्स का उल्लेख लगभग बंद कर दिया है। कंपनी अब बड़े AI मॉडल, AI चैटबॉट्स और Ray-Ban स्मार्ट डिस्प्ले ग्लासेज जैसे AI-आधारित हार्डवेयर पर जोर दे रही है।
विश्लेषकों का भी मानना है कि यह कदम कंपनी के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। कुछ समय पहले ही एक प्रमुख तकनीकी विश्लेषक ने अनुमान लगाया था कि मेटा जल्द ही हॉरिजन वर्ल्ड्स जैसे मेटावर्स प्रोजेक्ट को बंद कर सकती है। उनके अनुसार, ऐसा करने से मेटा अपने AI प्रोजेक्ट्स, जैसे Llama, Meta AI और AI ग्लासेज पर अधिक प्रभावी ढंग से ध्यान केंद्रित कर पाएगी, जो भविष्य के लिए अधिक आशाजनक दिख रहे हैं।
