मेरठ में सड़क चौड़ीकरण बना मुसीबत, घंटों जाम में फंसे लोग
मेरठ में मेट्रो पहुंचने की खुशी के बीच, शहर के एक महत्वपूर्ण मार्ग पर सड़क चौड़ीकरण का काम लोगों के लिए नई मुसीबतें खड़ी कर रहा है। रेलवे रोड चौराहे से घंटाघर तक लगभग 1200 मीटर की सड़क को आठ मीटर चौड़ा करने की योजना पर काम चल रहा है, लेकिन निर्माण की बेतरतीब ढंग से की जा रही प्रक्रिया ने आम जनता को भारी परेशानी में डाल दिया है।
मंगलवार की दोपहर, मोटर साइकिल से इस दूरी को तय करने में राहगीरों को 12 से 15 मिनट का समय लगा, वहीं साइकिल सवारों को 20 मिनट तक लग गए। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि चार पहिया वाहनों को इस मार्ग पर कितनी अधिक देर तक जाम का सामना करना पड़ रहा होगा। इस गंभीर जाम का मुख्य कारण सड़क के बीचों-बीच खंभे गाड़ना और ऊर्जा निगम द्वारा सड़क के किनारे खोदाई करके केबल डालना है, जबकि डिवाइडर को तोड़े बिना ही यह काम किया जा रहा है। इससे वाहनों के आवागमन के लिए पर्याप्त जगह नहीं मिल पा रही है।
सूत्रों के अनुसार, इस सड़क को पांच मीटर से बढ़ाकर आठ मीटर चौड़ा करने का प्रस्ताव राज्यसभा सदस्य डा. लक्ष्मीकांत बाजपेयी का था। लोक निर्माण विभाग प्रांतीय खंड के अधिशासी अभियंता सत्येंद्र सिंह ने बताया कि इस परियोजना पर सवा करोड़ रुपये का बजट खर्च किया जा रहा है। उन्होंने स्वीकार किया कि अभी केवल डिवाइडर की लेन सीधी करने के लिए खंभे लगाए गए हैं और सड़क चौड़ीकरण का मुख्य कार्य शुरू होने पर वाहनों के आवागमन के लिए विकल्प की व्यवस्था की जाएगी। हालांकि, वर्तमान में अपनाई जा रही कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।
इस सड़क पर अतिक्रमण भी जाम का एक प्रमुख कारण है। रेलवे रोड चौराहे से घंटाघर तक विभिन्न प्रकार की दुकानें हैं, जिनके सामने अक्सर दोपहिया वाहन खड़े हो जाते हैं। साथ ही, दुकानदार अपनी दुकानों के बाहर सामान फैला लेते हैं, जिससे वाहनों के निकलने का रास्ता संकरा हो जाता है और जाम लग जाता है।
विडंबना यह है कि इस पूरे 1200 मीटर के क्षेत्र में, जहां हर दिन भीषण जाम की स्थिति बनी रहती है, वहां यातायात व्यवस्था संभालने के लिए पुलिस की सक्रियता न के बराबर है। घंटाघर पर पुलिस चौकी होने के बावजूद, पुलिसकर्मी अक्सर आराम फरमाते नजर आते हैं। यह स्थिति तब है जब एसपी सिटी का कार्यालय भी इसी क्षेत्र में स्थित है। पूरे मार्ग पर कहीं भी पुलिस यातायात को सुचारू रूप से संचालित करती हुई नहीं दिखती, जिससे लोगों की परेशानी और बढ़ जाती है।
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