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मध्य प्रदेश में कोल्ड्रिफ कफ सीरप में 42% डीईजी, बच्चों की मौत की पुष्टि

By Dec 6, 2025

मध्य प्रदेश में हाल ही में हुई बच्चों की मौत के मामले में जांच कर रही विशेष जांच दल (एसआईटी) को बड़ी सफलता हाथ लगी है। कोल्ड्रिफ कफ सीरप के तीन और नमूनों को अमानक पाया गया है, जिनमें डायथिलीन ग्लाइकाल (डीईजी) की मात्रा चौंकाने वाली 42 प्रतिशत तक पाई गई है। यह मात्रा निर्धारित मानक से 420 गुना अधिक है, क्योंकि किसी भी कफ सीरप में डीईजी की अधिकतम स्वीकार्य सीमा केवल 0.1 प्रतिशत है।

ये तीनों अमानक पाए गए नमूने उन्हीं बोतलों से लिए गए थे, जिनका सेवन बच्चों ने किया था और जो पीने के बाद बच गए थे। राज्य औषधि प्रयोगशाला में कराई गई इन नमूनों की जांच के नतीजों ने इस बात की पुष्टि कर दी है कि बच्चों की मौत इसी विषाक्त कफ सीरप के सेवन से हुई थी। डायथिलीन ग्लाइकाल एक ऐसा रसायन है जो अत्यधिक मात्रा में सेवन करने पर गुर्दों को बुरी तरह प्रभावित करता है और किडनी फेलियर का कारण बन सकता है।

यह पहली बार नहीं है जब कोल्ड्रिफ कफ सीरप में डीईजी की इतनी अधिक मात्रा पाई गई है। इससे पहले, तमिलनाडु औषधि प्रशासन की जांच में इस सीरप में डीईजी की मात्रा 48.6 प्रतिशत और मध्य प्रदेश औषधि प्रशासन विभाग की प्रारंभिक जांच में 46.2 प्रतिशत पाई गई थी। इन लगातार सामने आ रहे नतीजों से दवा की गुणवत्ता और सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

इस मामले में कोल्ड्रिफ कफ सीरप बनाने वाली कंपनी श्रीसन फार्मास्युटिकल्स के मालिक जी. रंगनाथन ने यह दावा किया था कि उनके द्वारा दूसरे राज्यों में भेजे गए उसी बैच के सीरप से कोई शिकायत नहीं आई थी। इस दावे का खंडन करने और यह साबित करने के लिए कि बच्चों की मौत का सीधा संबंध कोल्ड्रिफ कफ सीरप से था, एसआईटी ने खुले बाजार में बिक रहे कफ सीरप के नमूनों की भी जांच कराई है।

यह भी उल्लेखनीय है कि कोल्ड्रिफ कफ सीरप के बैच नंबर एसआर-13 के अलावा, खांसी के ही सीरप रिलाइफ (बैच नंबर एलएसएल 25160) और रेस्पीफ्रेस टीआर-आर 01जीएल 2523 भी अमानक पाए गए थे। इन दोनों सीरपों में भी डीईजी की मात्रा निर्धारित मानक से काफी अधिक पाई गई थी। यह घटना दवा उद्योग में गुणवत्ता नियंत्रण और नियामक निकायों की भूमिका पर एक गंभीर चिंता का विषय है, और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग जोर पकड़ रही है।

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