मदरसा शिक्षकों को वेतन के लिए हाजिरी का प्रमाण पत्र अब अनिवार्य
उत्तर प्रदेश सरकार ने अनुदानित मदरसों में कार्यरत शिक्षकों के वेतन भुगतान को लेकर एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। अब से शिक्षकों को उनका मासिक वेतन तभी मिलेगा जब प्रबंधन द्वारा उनकी उपस्थिति का गहनता से सत्यापन कर एक प्रमाण पत्र प्रस्तुत किया जाएगा। यह व्यवस्था प्रदेश के सभी 561 अनुदानित मदरसों पर लागू होगी, जहाँ कुल 2.31 लाख छात्र-छात्राएं शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं।
इस सख्त कदम के पीछे आजमगढ़ के एक ऐसे मदरसा शिक्षक का मामला सामने आना है जो ब्रिटेन में रहकर भी उत्तर प्रदेश के एक अनुदानित मदरसे में कार्यरत था और जिसे वेतन वृद्धि व पेंशन का लाभ भी मिल रहा था। एंटी-टेररिस्ट स्क्वाड (ATS) की जांच में इस शिक्षक, शमशुल हुदा, के संदिग्ध अंतरराष्ट्रीय संबंध उजागर हुए। शमशुल 1984 में सहायक अध्यापक के पद पर नियुक्त हुआ था और 2007 से ब्रिटेन में रह रहा था, जहाँ उसने 2013 में ब्रिटिश नागरिकता भी प्राप्त कर ली थी। इसके बावजूद, अल्पसंख्यक कल्याण विभाग ने 2007 से 2017 तक बिना सेवा पुस्तिका की जांच किए उसकी वेतन वृद्धि जारी रखी और 2017 में उसे स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति देकर पेंशन भी स्वीकृत कर दी गई।
एटीएस की रिपोर्ट के आधार पर इस मामले में कई अधिकारियों की संलिप्तता पाई गई है। इस घटना ने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। भविष्य में ऐसी किसी भी अनहोनी को रोकने के लिए अल्पसंख्यक कल्याण विभाग ने कड़े कदम उठाए हैं। सूत्रों के अनुसार, अब एक-एक शिक्षक की हाजिरी को सत्यापित किया जाएगा और उसके बाद ही वेतन जारी होगा। जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे मदरसों का औचक निरीक्षण करें और यह सुनिश्चित करें कि जिन शिक्षकों को वेतन दिया जा रहा है, वे वास्तव में नियमित रूप से मदरसों में उपस्थित हो रहे हैं या नहीं।
हालांकि, शिक्षकों की उपस्थिति सत्यापित करने का नियम पहले से मौजूद है, लेकिन इस घटना के बाद इसके कड़ाई से पालन के निर्देश जारी किए गए हैं। इस नई व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी धन का दुरुपयोग न हो और केवल वास्तविक और उपस्थित शिक्षकों को ही उनका हक मिले। प्रदेश में अनुदानित मदरसों में 9,889 शिक्षक और 8,367 शिक्षणेत्तर कर्मचारी कार्यरत हैं, और इस नए नियम से उनकी कार्यशैली में भी अधिक जवाबदेही आएगी।
