Lucknow News: KGMU की मजार हटाने की नोटिस पर उलेमाओं का विरोध में, बोले- 15वीं सदी से है अस्तित्व
लखनऊ में किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) द्वारा मजारों को हटाने के नोटिस पर उलेमाओं ने रोष व्यक्त किया है। रविवार को दरगाह शाहमीना शाह परिसर में उलेमाओं की बैठक हुई, जिसमें उन्होंने KGMU के इस कदम को मनमाना बताया। उलेमाओं का कहना है कि ये मजारें KGMU के बनने से पहले से ही अस्तित्व में हैं और इनका इतिहास 15वीं सदी तक जाता है।
उलेमाओं ने बैठक में जोर देकर कहा कि KGMU को मजारों को हटाने से पहले कानूनी दस्तावेज दिखाने चाहिए। मौलाना कल्बे जवाद ने कहा कि वक्फ बोर्ड में दर्ज रिकॉर्ड को ही अंतिम माना जाता है। उन्होंने बताया कि 1912 में जब KGMU की स्थापना हुई थी, तब नुजूल विभाग द्वारा दरगाह और मजारों की भूमि को विश्वविद्यालय परिसर से अलग कर दिया गया था।
उलेमाओं ने पिछले घटनाक्रम का भी जिक्र किया, जब 26 अप्रैल 2025 को KGMU ने दरगाह शाह हरमैन को अवैध बताते हुए ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की थी। इसके बाद दरगाह कमेटी कोर्ट गई थी। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि अनाधिकृत दुकानों के निर्माण से संबंधित कोई भी कार्रवाई विधि द्वारा निर्धारित प्रक्रिया का पालन करते हुए ही की जाएगी। उलेमाओं ने कहा कि इन मजारों पर हिंदू-मुसलमान समेत हर समुदाय के लोगों की आस्था है और KGMUGMU को इस पर विचार करना चाहिए।
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