खतरनाक मांझे पर लखनऊ हाई कोर्ट सख्त, UP सरकार को Manjha Ban के लिए कानून बनाने का निर्देश
लखनऊ हाई कोर्ट ने खतरनाक ‘चाइनीज मांझे’ कहे जाने वाले लेड-कोटेड और नायलॉन मांझे के निर्माण, बिक्री और इस्तेमाल पर प्रभावी रोक लगाने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार को सख्त निर्देश दिए हैं। न्यायालय ने कहा है कि इस पर पूर्ण प्रतिबंध के लिए केवल शासनादेश जारी करना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि इसके लिए कानूनी प्रावधान बनाकर इसे रोकना होगा। कोर्ट ने राज्य सरकार को चेतावनी भी दी है कि यदि इन खतरनाक मांझों का निर्माण, बिक्री और उपयोग जारी रहता है, तो न्यायालय पीड़ितों को सरकार द्वारा मुआवजा देने का आदेश देने को मजबूर होगा। यह निर्णय आम जनता की सुरक्षा और जान-माल की हिफाजत के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
यह आदेश न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति एके चौधरी की खंडपीठ ने स्थानीय अधिवक्ता मोतीलाल यादव की जनहित याचिका पर पारित किया। याचिकाकर्ता ने न्यायालय को बताया कि फरवरी माह में ही ऐसे मांझों से लगभग दस लोग घायल हुए या उनकी मृत्यु हुई है। राज्य सरकार की ओर से जवाब देते हुए कहा गया कि 9 और 10 अक्टूबर को शासनादेश जारी कर मांझों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का आदेश दिया जा चुका है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि ये सिंथेटिक मांझे हैं जिन्हें ‘चाइनीज मांझा’ गलत नाम दिया गया है, क्योंकि ये चीन से आयात नहीं होते।
हालांकि, न्यायालय सरकार की दलीलों से संतुष्ट नहीं हुआ। कोर्ट ने टिप्पणी की कि जब भी ऐसे मांझे से गंभीर चोटों या मृत्यु की घटनाएं मीडिया की सुर्खियां बनती हैं, तभी अधिकारी सक्रिय होते हैं। न्यायालय ने जोर दिया कि ऐसे मांझे के निर्माण, विक्रय और उपयोग की रोकथाम के लिए एक स्थायी तंत्र स्थापित किया जाना चाहिए, जिसमें नियमित और निरंतर निगरानी की व्यवस्था हो। साथ ही, इस पर प्रभावी अंकुश लगाने और इसमें संलिप्त व्यक्तियों को उनके कृत्यों के लिए उत्तरदायी ठहराने के लिए विधि में उपयुक्त एवं कठोर प्रावधान किया जाना अनिवार्य है।
न्यायालय ने सरकार को एक नया शपथ पत्र दाखिल कर यह बताने को कहा है कि ऐसे मांझे के निर्माण, विक्रय एवं उपयोग की रोकथाम के लिए कैसे विधिक प्रावधान लागू करने का प्रस्ताव है। साथ ही, यह भी दर्शाया जाए कि विधि का उल्लंघन करने वाले व्यक्तियों को उत्तरदायी बनाने के लिए क्या ठोस कदम प्रस्तावित हैं। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि उत्तरदायित्व का प्रश्न केवल मांझे के निर्माण, विक्रय या उपयोग में संलिप्त व्यक्तियों तक ही सीमित न रहे, बल्कि उन अधिकारियों और कर्मचारियों तक भी विस्तारित हो जो अपने वैधानिक कर्तव्यों के निर्वहन में विफल रहते हैं और इसकी रोकथाम सुनिश्चित करने में असफल रहते हैं। मामले की अगली सुनवाई 11 मार्च को होगी।
अलीगढ़ में 10 हजार से अधिक दाखिल-खारिज मामले लंबित, Aligarh property news में देरी से लोग परेशान
अलीगढ़ में पुनर्जीवित होंगी पांच विलुप्त नदियां, ‘नमामि गंगे’ योजना से जगी आस | Aligarh News
कानपुर: जलालपुर गांव में किशोर ने की आत्महत्या, परिजनों में कोहराम, Kanpur suicide news
यूपी में निर्माण कार्यों में पीने के पानी पर रोक, योगी सरकार का बड़ा फैसला, ‘UP construction rules’ लागू
यूपी विधानसभा में मंत्री-विधायक की नोकझोंक, ऊर्जा मंत्री ने दी बिजली दरों पर राहत की जानकारी | UP Assembly news
कानपुर: पीएसी मोड़ बाईपास पर Road Accident में राहगीर की मौत, शिनाख्त नहीं
कानपुर में भीषण Road accident, तेज रफ्तार वाहन ने राहगीर को कुचला, मौत
यूपी की ट्रेनों में ‘QR Code’ से होगी असली वेंडर की पहचान, IRCTC-GRP का बड़ा फैसला
