दिल्ली ब्लास्ट में गई जान, एक महीने बाद भी मुआवजे का इंतजार: बिखरा परिवार, बच्चों की पढ़ाई पर संकट
दिल्ली में 10 नवंबर को लाल किले के बाहर हुए आतंकी हमले की चपेट में आए मोहसिन की दर्दनाक मौत हो गई थी। मूल रूप से मेरठ के रहने वाले मोहसिन चांदनी चौक के आसपास ई-रिक्शा चलाते थे और अपनी पत्नी सुल्ताना और दो बच्चों, बेटी हिफ्जा और बेटे अहद के साथ दरिया गंज के सूईवालान इलाके में रहते थे।
उनकी मौत के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ तो टूटा ही, साथ ही उनकी आर्थिक स्थिति और भी खस्ता हाल में चल रही है। सरकार द्वारा परिवार को दस लाख के मुआवजे का ऐलान तो किया गया लेकिन, पिछले एक महीने से परिवार मुआवजे के लिए दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर है। परिवार में मोहसिन ही कमाने वाले थे। उनकी मौत के बाद ब्यूटी पार्लर चलाने वाली मोहसिन की भाभी नाजिश ने ही परिवार का जिम्मा संभाला हुआ है।
नाजिश ने बताया कि दोनों बच्चे स्कूल तो जा रहे हैं, लेकिन घर का किराया व अन्य जरूरत की चीजों के लिए परिवार को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि चार दिन पहले ही मुआवजे के लिए वेरिफिकेशन हुई है और उन्हें आश्वासन दिया गया है कि जल्द ही उन्हें मुआवजे का पैसा मिल जाएगा।
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