लखनऊ में फर्जी नारकोटिक्स अधिकारी गिरफ्तार, करोड़ों की ठगी का जालसाज चढ़़ा पुलिस के हत्थे
लखनऊ पुलिस ने एक ऐसे जालसाज को गिरफ्तार किया है जो खुद को पुलिस, नारकोटिक्स और क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताकर लोगों को डिजिटल अरेस्ट करने के नाम पर करोड़ों रुपये की ठगी करता था। आरोपित प्रदीप सोनी को पलासियो माल के पास से गिरफ्तार किया गया है।
अपर पुलिस अधीक्षक विशाल विक्रम सिंह ने बताया कि गिरफ्तार किए गए जालसाज प्रदीप सोनी के पास से दो मोबाइल फोन, कुछ खाली चेक, एटीएम कार्ड, बैंक खातों से जुड़े कई स्क्रीनशॉट और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद हुए हैं। इन दस्तावेजों की मदद से पुलिस गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश कर रही है।
जांच में यह बात सामने आई है कि प्रदीप सोनी मूल रूप से मध्य प्रदेश के विदिशा का निवासी है। गिरोह ने डॉक्टर बीएन सिंह से 95 लाख रुपये की ठगी की थी, जिसमें 420 से अधिक ट्रांजैक्शन किए गए थे। रकम को 11 अलग-अलग बैंक खातों में घुमाया गया था। इस मामले में पुलिस पहले भी जुलाई 2025 में गिरोह के दो सदस्यों मोहम्मद इकबाल और शाइन इकबाल को महाराष्ट्र से गिरफ्तार कर चुकी है। प्रदीप सोनी की गिरफ्तारी से गिरोह के वित्तीय नेटवर्क को समझने में पुलिस को और मदद मिली है।
पूछताछ के दौरान प्रदीप सोनी ने स्वीकार किया कि रोजगार छूटने के बाद जल्दी पैसा कमाने के लालच में वह इस गिरोह से जुड़ गया था। वह बैंक खातों की किट, एटीएम कार्ड, सिम कार्ड और इंटरनेट बैंकिंग की जानकारी इकट्ठा कर गिरोह के एक सदस्य रोहित उर्फ बिट्टू तक पहुंचाता था। यह गिरोह न केवल डिजिटल अरेस्ट के नाम पर ठगी करता था, बल्कि ऑनलाइन गेमिंग फ्रॉड, शेयर ट्रेडिंग और होटल रेटिंग फ्रॉड जैसे धंधों में भी संलिप्त था।
पुलिस की विशेष कार्यबल (एसटीएफ) अब गिरोह के तकनीकी जानकारों, क्रिप्टो वॉलेट, बैंक खातों और अन्य ठिकानों का पता लगाने में जुटी है। बरामद किए गए इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की फोरेंसिक जांच कराई जाएगी। आरोपित प्रदीप सोनी को साइबर क्राइम थाना, लखनऊ में दर्ज मामले में विभिन्न धाराओं के तहत जेल भेज दिया गया है।
यह पूरा मामला तब सामने आया जब इसी साल छह अप्रैल को डॉक्टर बीएन सिंह को एक व्यक्ति ने ब्लू डार्ट कूरियर कंपनी का कर्मचारी बनकर फोन किया। उसने दावा किया कि डॉक्टर के नाम से एक अवैध पार्सल पकड़ा गया है। इसके बाद, मोहनदास नाम के एक व्यक्ति ने खुद को जांच अधिकारी बताकर डॉक्टर को वाट्सएप वीडियो कॉल पर पुलिस की वर्दी में आकर डिजिटल अरेस्ट की धमकी दी। अगले तीन दिनों तक लगातार वीडियो कॉल पर दबाव बनाकर डॉक्टर से कहा गया कि जांच पूरी होने तक वे 95 लाख रुपये एक फर्जी ‘आरबीआइ निर्देश’ वाले पत्र के आधार पर बताए गए खाते में जमा कर दें। डर और धमकी के चलते डॉक्टर ने बताई गई राशि खाते में ट्रांसफर कर दी, जिसके बाद यह पूरा फर्जीवाड़ा सामने आया।
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