लेबर कोड से राज्यों को मिलेगा आर्थिक बूस्ट: श्रम मंत्रालय की रिपोर्ट का खुलासा
नए लेबर कोड को लागू करने के फैसले पर जहाँ एक ओर सरकार इसे आर्थिक विकास और रोजगार के लिए गेमचेंजर बता रही है, वहीं दूसरी ओर कई श्रम संगठन इसे कामगारों के हित के खिलाफ बताते हुए विरोध कर रहे हैं। सरकार का तर्क है कि यह नई श्रम संहिता आर्थिक प्रगति को नई गति प्रदान करेगी।
केंद्र सरकार का यह आकलन कई राज्यों में पिछले कुछ वर्षों में लागू किए गए श्रम सुधारों के सकारात्मक नतीजों पर आधारित है। केंद्रीय श्रम मंत्रालय द्वारा कराए गए एक अध्ययन में यह पाया गया है कि जिन राज्यों ने 2020 में पारित चारों लेबर कोड से मिलते-जुलते संशोधन अपने राज्य के श्रम कानूनों में किए हैं, वहाँ उत्पादन, निवेश, रोजगार के साथ-साथ आर्थिक विकास की गति में भी बढ़ोतरी हुई है। इस सूची में भाजपा-एनडीए शासित बिहार, उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश, गुजरात जैसे राज्यों के साथ-साथ गैर-एनडीए शासित पंजाब, केरल और कर्नाटक जैसे राज्य भी शामिल हैं।
राजस्थान को भी इसी श्रेणी में गिना जा सकता है, क्योंकि कांग्रेस सरकार द्वारा राज्य के श्रम कानूनों में किए गए संशोधन का लाभ अब प्रदेश को मिल रहा है। यह दिलचस्प है कि उद्योग-निवेश को आकर्षित करने के लिए श्रम कानूनों में बदलाव करने वाले राज्यों में गैर-भाजपा शासित राज्य भी शामिल हैं।
केंद्रीय श्रम मंत्री ने भी इस बात की पुष्टि की है कि 18 राज्यों ने चारों केंद्रीय लेबर कोड से मिलते-जुलते बदलाव अपने प्रदेशों में कर लिए हैं, जिनमें कांग्रेस और वामपंथी दलों की सरकारें भी शामिल हैं। पश्चिम बंगाल को छोड़कर, इनमें अधिकांश बड़े राज्य हैं।
अपने श्रम कानूनों में बदलाव के बाद इन राज्यों में आर्थिक विकास और रोजगार के मोर्चे पर सकारात्मक प्रगति हुई है। केंद्रीय श्रम मंत्रालय ने चारों लेबर कोड लागू करने की अधिसूचना जारी करने से पहले इसका एक विस्तृत अध्ययन भी कराया। आंध्र प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, पंजाब, बिहार, राजस्थान और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में वहां किए गए श्रम सुधारों के प्रभाव का अध्ययन किया गया, जिसमें पाया गया कि राज्यों के सकल घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) दर में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। उदाहरण के तौर पर, गुजरात के 2023-24 के जीएसडीपी में पिछले वर्ष की तुलना में 13.36 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जिसमें विनिर्माण क्षेत्र की हिस्सेदारी लगभग 28-30 प्रतिशत रही, जो राष्ट्रीय औसत 17 प्रतिशत से काफी अधिक है।
