खगड़िया का अगुवानी बस स्टैंड उपेक्षा का शिकार, यात्री सुविधाओं का घोर अभाव
खगड़िया जिले के परबत्ता प्रखंड स्थित बहुचर्चित अगुवानी बस स्टैंड आज उपेक्षा का शिकार है। यह स्टैंड लाखों रुपये के राजस्व का स्रोत होने के बावजूद यात्रियों को बुनियादी सुविधाओं से कोसों दूर है। स्टैंड पर अतिक्रमणकारियों का राज कायम हो गया है, वहीं दूसरी ओर सरकारी बस सेवा का पूर्णतः अभाव है।
वर्षों पूर्व, तत्कालीन परिवहन मंत्री व परबत्ता के पूर्व विधायक स्मृति शेष आरएन सिंह के कार्यकाल में इस बस स्टैंड से विभिन्न गंतव्यों के लिए सरकारी बसों का परिचालन होता था। उस समय यह स्टैंड काफी व्यस्त और महत्वपूर्ण माना जाता था। लेकिन वर्तमान स्थिति बिल्कुल विपरीत है। आज लोग सरकारी बस सेवा की सुविधा के लिए तरस रहे हैं। स्थानीय जनप्रतिनिधियों की ओर से भी इस दिशा में कोई ठोस पहल नहीं की जा रही है।
एक दशक पहले तक राजधानी पटना सहित अन्य शहरों से परिवहन विभाग की बसें यहां तक आती थीं। परंतु आज यहां से सिर्फ दो दर्जन से अधिक निजी बसें संचालित हो रही हैं, जिनसे यात्रियों का आर्थिक शोषण हो रहा है। सरकार को इस स्टैंड से राजस्व तो मिल रहा है, लेकिन यात्रियों को न तो सरकारी बस की सुविधा मिल पा रही है और न ही अन्य आवश्यक सुविधाएं।
आजादी के बाद इस क्षेत्र में पीडब्ल्यूडी सड़क का निर्माण हुआ, जिसके बाद बस स्टैंड की स्थापना की गई थी। तब यह एक चर्चित और व्यस्ततम स्टैंड था, जहाँ से कई जगहों के लिए बसें खुलती थीं। समय के साथ, इसकी उपेक्षा शुरू हो गई और आज इस स्टैंड की देखरेख करने वाला कोई नहीं है। यात्रियों के बैठने, शौचालय, पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाओं का घोर अभाव है। वर्षों पूर्व कराई गई ईंट सोलिंग की सड़कें गड्ढों में तब्दील हो गई हैं। बनाया गया मुसाफिर खाना भी खंडहर बन चुका है। दुकानदार और स्थानीय लोग स्टैंड परिसर का अतिक्रमण कर कब्जा जमा चुके हैं।
पूर्व में अतिक्रमण हटाने और सौंदर्यीकरण के प्रयास भी असफल रहे हैं। वर्ष 2015-16 में तत्कालीन प्रखंड विकास पदाधिकारी सह अंचल अधिकारी ने पहल की थी, लेकिन उनके स्थानांतरण के बाद मामला ठंडे बस्ते में चला गया। विकास के लिए एक समिति का गठन किया गया और स्टैंड का डाक भी निकाला जाने लगा, जिसकी राशि समिति के खाते में जमा होती रही और निकलती भी रही, लेकिन स्टैंड के विकास के नाम पर कुछ भी नहीं हुआ। पूर्व विधायक स्मृतिशेष आरएन सिंह के कार्यकाल में धर्मशाला और परिसर के कुछ हिस्सों का जीर्णोद्धार जरूर कराया गया था, लेकिन वह भी अब जीर्ण-शीर्ण अवस्था में है।
