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क्या रील्स की लत आपके दिमाग को बना रही है सुस्त? जानिए ‘ब्रेन रॉट’ का सच

By Nov 25, 2025

सोशल मीडिया की दुनिया में कॉन्टेंट की कोई कमी नहीं है, खासकर शॉर्ट वीडियो प्लेटफॉर्म्स पर। एक मिनट के अंदर अनगिनत रील्स देखने को मिल जाती हैं, और अक्सर लोग उन्हें बिना पूरी तरह देखे ही आगे बढ़ा देते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि घंटों तक इन रील्स को स्क्रॉल करने की यह आदत आपके दिमाग को धीमा और कमज़ोर बना सकती है? इसे ‘डूम स्क्रॉलिंग’ के नाम से जाना जाता है, जिसके गंभीर प्रभाव हो सकते हैं।

आजकल हमारे जीवन का हर पहलू, चाहे वह तैयार होना हो, खाना बनाना हो, या किसी विषय पर जानकारी प्राप्त करना हो, अक्सर 30 सेकंड के वीडियो में सिमट कर रह जाता है। कॉन्टेंट की इस भरमार के कारण लोग अपना काफी समय रील्स स्क्रॉल करने में बिताते हैं। इस प्रक्रिया को ‘डूम स्क्रॉलिंग’ कहा जाता है, जिसमें व्यक्ति कुछ भी प्रोडक्टिव किए बिना बस स्क्रॉल करता रहता है। अब यह आदत सिर्फ समय की बर्बादी नहीं, बल्कि सीधे तौर पर दिमाग पर असर डालने वाली व्यवहारिक समस्या मानी जा रही है, जिसे ‘ब्रेन रॉट’ (Brain Rot) कहा जाता है। सवाल यह है कि क्या वाकई रील्स हमें ‘ब्रेन रॉट’ की ओर धकेल रही हैं?

‘ब्रेन रॉट’ शब्द, जो कि जेन-ज़ेड स्लैंग के रूप में उभरा है, का इस्तेमाल उस मानसिक स्थिति के लिए किया जाता है जहाँ व्यक्ति को ब्रेन फॉग, ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई और सीखने की क्षमता में कमी महसूस होती है। यह सब लगातार शॉर्ट वीडियो स्क्रॉल करने के कारण होता है। कई वैज्ञानिक शोधों ने इस बात की पुष्टि की है कि सैकड़ों वीडियो को कुछ ही मिनटों में तेज़ी से देखने का पैटर्न हमारे दिमाग की उत्तेजना को लगातार बढ़ाए रखता है। धीरे-धीरे, यह पैटर्न दिमाग की सामान्य काम करने की क्षमता को प्रभावित करने लगता है।

हाल ही में किए गए एक बड़े मेटा-एनलिसिस में, जिसमें लगभग एक लाख प्रतिभागियों को शामिल कर 71 अलग-अलग स्टडीज का विश्लेषण किया गया, यह पाया गया कि लगातार शॉर्ट वीडियो देखने से व्यक्ति की ध्यान केंद्रित करने (फोकस) और आत्म-नियंत्रण (सेल्फ-कंट्रोल) की क्षमता कमजोर हो जाती है। इसके अलावा, ऐसे व्यवहार से तनाव और चिंता (एंग्जायटी) बढ़ने की संभावना भी काफी अधिक होती है।

‘न्यूरोइमेज’ नामक प्रतिष्ठित जर्नल में प्रकाशित एक अन्य अध्ययन के अनुसार, शॉर्ट वीडियो की लत हमारे मस्तिष्क के ‘ग्रे मैटर’ (Grey Matter) को भी प्रभावित कर सकती है। ग्रे मैटर सीधे तौर पर हमारी याददाश्त, भावनाओं और निर्णय लेने जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं के लिए जिम्मेदार होता है। इस अध्ययन में ऐसे व्यक्तियों में ईर्ष्या की भावना बढ़ने, परिणामों की परवाह न करने और जानकारी को धीमी गति से समझने जैसी समस्याएं देखी गईं।

हालांकि, अच्छी खबर यह है कि हमारा दिमाग अत्यधिक लचीला (फ्लेक्सिबल) होता है और यह अपनी आदतों को बदल सकता है। इसलिए, यह बहुत महत्वपूर्ण है कि हम अपनी रील स्क्रॉलिंग के समय को सचेत रूप से कम करें। इसके लिए कुछ सरल उपाय अपनाए जा सकते हैं, जैसे कि हर दिन का एक निश्चित समय रील्स के लिए निर्धारित करना और उस समय सीमा का पालन करना।

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