ऑक्सफोर्ड में पाक की चाल: बिना हुई बहस के जीत का दावा
ऑक्सफोर्ड यूनियन जैसे प्रतिष्ठित मंच का इस्तेमाल पाकिस्तान ने एक बार फिर अपनी पुरानी चालबाजी का प्रदर्शन करने के लिए किया है। सूत्रों के अनुसार, एक ऐसी बहस का आयोजन किया गया था जिसका उद्देश्य ‘यह सदन मानता है कि पाकिस्तान के प्रति भारत की नीति सुरक्षा नीति के रूप में बेचा गया एक लोकलुभावन कदम है’ विषय पर विचार-विमर्श करना था। हालांकि, भारतीय प्रतिभागियों के खुलासे के अनुसार, यह बहस कभी आयोजित होने वाली ही नहीं थी, बल्कि यह पाकिस्तान की एक सोची-समझी चाल थी।
इस पूरी कवायद के पीछे ऑक्सफोर्ड यूनियन के अध्यक्ष मूसा हरराज का हाथ बताया जा रहा है, जो पाकिस्तानी मूल के हैं और पाकिस्तान के संघीय रक्षा उत्पादन मंत्री मुहम्मद रजा हयात हरराज के पुत्र हैं। जानकारी के अनुसार, हरराज ने भारतीय पक्ष को किसी तरह की गलत सूचना देकर या आयोजन के तौर-तरीकों में हेरफेर करके इस विवाद को जन्म दिया, ताकि वे एकतरफा जीत का दावा कर सकें।
सूत्रों का कहना है कि यह एक सोची-समझी रणनीति थी, जिसका मकसद यह दिखाना था कि भारतीय पक्ष किसी भी बौद्धिक संवाद से कतराता है। यदि यह बहस वास्तव में होती, तो भारत के अनुभवी नेता और वक्ता पाकिस्तान द्वारा दशकों से प्रायोजित आतंकवाद के पुख्ता सबूतों के साथ उसे वैश्विक मंच पर बेनकाब कर सकते थे। पाकिस्तान जानता था कि इस ‘रक्तहीन युद्ध’ में उसकी हार निश्चित थी, इसलिए उसने बिना लड़े ही जीत का ढोल पीटने का आसान रास्ता चुना।
ऑक्सफोर्ड यूनियन के अध्यक्ष मूसा हरराज, जिनसे संपर्क करने की तमाम कोशिशें की गईं, वे फिलहाल गायब बताए जा रहे हैं। उनका कोई भी बयान उपलब्ध नहीं हो सका है, जिससे उनके दावों की सत्यता पर और भी प्रश्नचिन्ह लग गया है। यह घटनाक्रम पाकिस्तान की उस पुरानी आदत की याद दिलाता है, जहाँ वह अक्सर वास्तविकता को तोड़-मरोड़ कर पेश करता है। इससे पहले भी, ऑपरेशन सिंधूर के बाद पाकिस्तान ने ऐसी ही झूठी जीत का दावा किया था, जबकि हकीकत में उसे भारी नुकसान उठाना पड़ा था।
