5 करोड़ की ITC धोखाधड़ी: तीन वरिष्ठ अधिकारी निलंबित, खाली ट्रकों से हो रहा था खेल
वस्तु एवं सेवाकर (जीएसटी) प्रणाली में एक बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है, जिसमें दिल्ली से लखनऊ तक खाली ट्रक चलाकर करीब पांच करोड़ रुपये की इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) हड़प ली गई। इस मामले में घोर लापरवाही बरतने के आरोप में राज्य कर विभाग के लखनऊ जोन के एडिशनल कमिश्नर सहित तीन वरिष्ठ अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है। इन निलंबित अधिकारियों को झांसी कार्यालय से संबद्ध किया गया है।
संयोगवश, इन्हीं अधिकारियों ने इस फर्जीवाड़े को पकड़ा था, लेकिन जांच और कार्रवाई में बरती गई कथित लापरवाही और मिलीभगत के चलते अब उन्हें ही निलंबित कर दिया गया है। राज्य कर विभाग ई-वे बिल की निगरानी के माध्यम से जीएसटी चोरी रोकने के लिए सक्रिय है। इसी निगरानी के दौरान कुछ ऐसे जालसाजों का पर्दाफाश हुआ जो खाली ट्रकों का इस्तेमाल करके आईटीसी का दुरुपयोग कर रहे थे।
गत छह सितंबर को दिल्ली से लखनऊ आ रहे चार ट्रक, जिनके नंबर यूपी82 टी 9714, एचआर 63 ई 9906, एचआर 38 की 9341 और पीसी एफवी 5297 थे, उन्हें पकड़ा गया। जांच में सामने आया कि ये ट्रक बिना किसी माल के चल रहे थे, लेकिन इनके लिए ई-वे बिल बनाए गए थे। आकाश कारपोरेशन प्राइवेट लिमिटेड, नई दिल्ली ने गासपेल प्रेस सी 135, निराला नगर और गासपेल प्रेस सी ए टू, सी ए छह इनसेलरी खंड, नादरगंज, अमौसी, लखनऊ के नाम पर ई-वे बिल जारी किए थे।
तत्कालीन एडिशनल कमिश्नर ग्रेड टू लखनऊ प्रथम के निर्देशों पर डिप्टी कमिश्नर घनश्याम मधेशिया और संयुक्त आयुक्त सुशील कुमार सिंह ने इस मामले में कार्रवाई की थी। हालांकि, अब जारी किए गए राज्यपाल के आदेश में कहा गया है कि इन अधिकारियों ने क्रेता और विक्रेता के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं कराई, जबकि आरोपित व्यापारी ने पांच करोड़ रुपये की आईटीसी हड़प ली थी। इसके अलावा, उन्होंने आईटीसी को ब्लॉक कराने की भी आवश्यकता नहीं समझी।
आदेश में यह भी उल्लेख किया गया है कि जांच में केवल 3.57 करोड़ रुपये के माल का जिक्र किया गया और 45.87 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया, जबकि माल के मूल्य के बराबर जुर्माना लगाया जा सकता था। अधिकारियों ने सीसी फुटेज तक की मांग नहीं की और न ही व्यापारी से माल दिखाने के लिए कहा। इन सभी कमियों को मिलीभगत का परिणाम माना जा रहा है।
निलंबित एडिशनल कमिश्नर ने इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि उनके निर्देश पर ही यह फर्जीवाड़ा पकड़ा गया था, लेकिन जांच रिपोर्ट आने से पहले ही कार्रवाई करने वालों को निलंबित कर दिया गया। यह मामला जीएसटी प्रणाली में जवाबदेही और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
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