कर्मचारियों ने की मनमानी कार्रवाई के खिलाफ आवाज, बहाली व सुनवाई की मांग
सोमवार को विकास भवन दबरई में राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें कर्मचारियों ने अपनी विभिन्न समस्याओं को प्रमुखता से उठाया। बैठक में वक्ताओं ने कहा कि कई अधिकारियों द्वारा मनमाने ढंग से कर्मचारियों के खिलाफ अनैतिक कार्रवाई की जा रही है, जिससे कर्मचारियों में भारी असंतोष है।
कर्मचारियों ने अपनी कार्यअवधि को लेकर भी शिकायतें कीं। उन्होंने बताया कि नियमानुसार ड्यूटी का समय सुबह दस बजे से शाम पांच बजे तक है, लेकिन इसके बावजूद कुछ अधिकारी सुबह सात बजे ही कर्मचारियों को क्षेत्र में बुला लेते हैं और रात आठ बजे तक बैठकें चलती रहती हैं। यह स्थिति कर्मचारियों के लिए अत्यधिक तनावपूर्ण है और उनके व्यक्तिगत जीवन को प्रभावित कर रही है।
बैठक में ग्राम विकास विभाग में वरिष्ठ सहायक के पद पर कार्यरत देवेंद्र कुमार का मामला भी सामने आया। सूत्रों के अनुसार, देवेंद्र कुमार ने छह एवं सात नवंबर का आकस्मिक अवकाश लेने के लिए अपना प्रार्थना पत्र कार्यालय में जमा कर दिया था। इसके बावजूद, अधिकारियों ने उनका दो दिन का वेतन काट लिया। यह कार्रवाई कर्मचारियों के लिए चिंता का विषय है, क्योंकि यह उनके अवकाश संबंधी नियमों के विपरीत प्रतीत होती है।
एक अन्य गंभीर मामले में, विकास खंड फिरोजाबाद की ग्राम विकास अधिकारी ज्योति सिन्हा को एक कथित फर्जी शिकायत के आधार पर निलंबित कर दिया गया। कर्मचारी नेताओं ने इस बात पर गहरा खेद व्यक्त किया कि ऐसे मामलों में कर्मचारियों को अपनी बात रखने का या अपना पक्ष स्पष्ट करने का उचित अवसर भी नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने मांग की कि निलंबित कर्मचारियों को तुरंत बहाल किया जाए और उन्हें अपनी बात कहने का पूरा मौका दिया जाए।
परिषद के सदस्यों ने प्रशासन से अपील की है कि वह कर्मचारियों की समस्याओं को गंभीरता से ले और अधिकारियों के मनमाने रवैये पर अंकुश लगाए। कर्मचारियों का कहना है कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो वे आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि निष्पक्ष जांच और सुनवाई का अवसर मिलना हर कर्मचारी का अधिकार है।
