कफ सीरप पीने से मासूम की मौत, दूसरा गंभीर, परिवार में मातम
उत्तर प्रदेश के औरैया जिले से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहाँ खांसी की दवा के रूप में पिलाया गया कफ सीरप दो मासूम भाइयों के लिए जानलेवा साबित हुआ। ऐरवाकटरा थाना क्षेत्र के गांव नगला कहारन में शुक्रवार दोपहर हुई इस घटना ने पूरे परिवार को मातम में डुबो दिया है।
घटना के अनुसार, पटना बेला निवासी सचिन कुमार अपनी पत्नी नेहा और दो मासूम बेटों, 18 महीने के रोहन और नौ महीने के सोहन के साथ, गुरुवार को रिश्तेदारी में दोवामाफी मंदिर गए थे। मुंडन संस्कार के बाद परिवार गांव नगला कहारन में अपने साढ़ू के घर रुक गया। शुक्रवार सुबह बच्चों को खांसी और उल्टी की शिकायत हुई। परिजनों के अनुसार, घर पर मौसी द्वारा लाई गई एक कफ सीरप, जिसका नाम कोफजिन बताया जा रहा है, बच्चों को पिला दी गई। इसके बाद बच्चों को दूध पिलाकर सुला दिया गया।
दोपहर तीन बजे तक जब बच्चे नहीं उठे तो परिजनों ने उन्हें जगाने की कोशिश की। किसी भी गतिविधि का अभाव देखकर उन्हें तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बिधूना ले जाया गया। वहां चिकित्सकों ने जांच के बाद बड़े बेटे रोहन को मृत घोषित कर दिया। वहीं, छोटे बेटे सोहन की हालत बेहद नाजुक होने के कारण उसे उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय सैफई रेफर कर दिया गया है।
स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्सक डॉक्टर प्रदीप सिंह ने बताया कि बच्चों को उनके परिजन लेकर आए थे, जिनमें से एक की मौत हो चुकी थी। डॉक्टर के अनुसार, कफ सीरप पिलाने के बाद बच्चों को दूध पिलाकर सुला दिया गया था और डकार न लगने के कारण सांस की नली में समस्या हो सकती है। कुछ मेडिकल स्टोर संचालकों का कहना है कि बच्चों को शायद दवा की अधिक मात्रा दे दी गई होगी, जबकि दवा का फार्मूला बच्चों के लिए सुरक्षित है और उन्हें ढाई से तीन एमएल तक ही दिया जाना चाहिए।
घटना से आहत परिजनों ने मासूम रोहन के शव का पोस्टमार्टम कराने से इनकार कर दिया और शव को घर ले गए। इस घटना ने कफ सीरप के इस्तेमाल और बच्चों को दवा देने के तरीकों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों में भी इस घटना को लेकर गहरा सदमा है।
