कानपुर विश्वविद्यालय: शिक्षकों पर पोर्टलों के अनुपालन का बोझ, शिक्षण कार्य प्रभावित, UP education news
कानपुर विश्वविद्यालय से संबद्ध महाविद्यालयों के प्राचार्यों और शिक्षकों को इन दिनों विभिन्न सरकारी पोर्टलों के अनुपालन के कारण भारी दबाव का सामना करना पड़ रहा है। आधारभूत सुविधाओं और पर्याप्त कर्मचारियों की कमी के चलते यह पूरा बोझ शिक्षकों पर आ गया है, जिससे उनके शिक्षण, शोध और सृजनात्मक कार्य बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं। इस स्थिति का सीधा असर छात्रों की शिक्षा गुणवत्ता पर पड़ रहा है। इस गंभीर मुद्दे पर कानपुर विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (कूटा) ने एक वर्चुअल बैठक कर रणनीति बनाई है।
शिक्षक संघ की प्रमुख मांगें
कूटा के अध्यक्ष डॉ. बीडी पांडेय ने बताया कि बैठक में विश्वविद्यालय से संबद्ध अनुदानित महाविद्यालयों के पदाधिकारी और शिक्षकों ने हिस्सा लिया। सर्वसम्मति से चार महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। संघ ने मांग की है कि अनेक पोर्टलों के स्थान पर एक एकीकृत पोर्टल बनाया जाए ताकि डेटा एंट्री का काम सुव्यवस्थित हो सके। इसके अतिरिक्त, महाविद्यालयों में इस कार्य के लिए लिपिकीय पद स्वीकृत किए जाएं, जिससे शिक्षक अपने मुख्य कार्य, यानी अध्ययन-अध्यापन व शोध पर ध्यान केंद्रित कर सकें।
सुविधाओं का अभाव और पंजीकरण प्रक्रिया स्थगित करने की मांग
शिक्षकों ने यह भी मांग की है कि सभी कॉलेजों में निःशुल्क और निर्बाध इंटरनेट वाई-फाई सुविधा उपलब्ध कराई जाए, जो कि वर्तमान में एक बड़ी चुनौती है। इन आवश्यक व्यवस्थाओं के लागू होने तक पोर्टल पर पंजीकरण प्रक्रिया को स्थगित रखा जाए। डॉ. पांडेय ने बताया कि पोर्टल पर पंजीकरण के बाद डेटा भरने में शिक्षकों को कई तकनीकी और व्यावहारिक समस्याएं आ रही हैं। निदेशालय से अनुरोध किया गया है कि इन समस्याओं का समाधान करने के बाद ही प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाए, जिससे अनावश्यक भ्रम और शिक्षकों पर पड़ने वाले दबाव से बचा जा सके। यह मुद्दा UP education news में महत्वपूर्ण स्थान रखता है क्योंकि यह राज्य की उच्च शिक्षा प्रणाली को प्रभावित कर रहा है।
