कानपुर रेप केस: दरोगा के सामने नाबालिग से दरिंदगी, डीसीपी पश्चिमी हटाए गए, इंस्पेक्टर-एसआई निलंबित
कानपुर के सचेंडी थाना क्षेत्र में एक नाबालिग से कथित दुष्कर्म के मामले में पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है। घटना में पुलिस की भूमिका पर गंभीर सवाल उठने के बाद पुलिस आयुक्त ने डीसीपी पश्चिम दिनेश कुमार त्रिपाठी को पद से हटा दिया है। इसके साथ ही, सचेंडी के थाना प्रभारी विक्रम सिंह और घटना के समय मौजूद दरोगा अमित मौर्या को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
मामले की पृष्ठभूमि और लापरवाही
सचेंडी के एक गांव निवासी युवक ने मंगलवार को मुकदमा दर्ज कराया था। युवक के मुताबिक, उसकी 14 वर्षीय बहन सोमवार रात घर से थोड़ी दूरी पर गई थी। रात करीब 12 बजे वह लौटी और बताया कि काली कार सवार दो युवकों ने उसे जबरदस्ती कार में बिठा लिया और रेलवे लाइन किनारे ले गए। वहां उनमें से एक युवक ने उससे रेप किया। पुलिस जांच में यू-ट्यूबर व खुद को पत्रकार बताने वाले शिवबरन यादव का नाम सामने आया। पूछताछ में पता चला कि घटना में प्रयुक्त काली कार दरोगा अमित मौर्या की थी और वारदात के समय वह भी मौके पर मौजूद था। आरोप है कि घटना को छिपाने और सही तथ्य अफसरों तक न पहुंचाने में सचेंडी थाना प्रभारी विक्रम सिंह ने अहम भूमिका निभाई। उन्होंने पॉक्सो एक्ट की धाराएं भी नहीं लगाईं, जिससे मामले की गंभीरता कम करने का प्रयास किया गया।
अधिकारियों पर कार्रवाई और जांच
पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल ने थाना प्रभारी विक्रम सिंह और दरोगा अमित मौर्या को निलंबित करने का आदेश दिया। डीसीपी पश्चिम दिनेश कुमार त्रिपाठी को भी हटा दिया गया। आरोपी शिवबरन यादव को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। पीड़िता का मेडिकल कराने के बाद पुलिस ने उसके बयान दर्ज किए हैं। पुलिस आयुक्त ने कहा कि घटना को तोड़-मरोड़कर पेश करने और पॉक्सो में कार्रवाई न करने की लापरवाही के चलते थाना प्रभारी और दरोगा को निलंबित किया गया है। आरोपी दरोगा की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की चार टीमों और क्राइम ब्रांच को लगाया गया है।
दरोगा की भूमिका और बचाव का प्रयास
चर्चा है कि आरोपी दरोगा अमित मौर्या का डीसीपी पश्चिम दिनेश त्रिपाठी ने तीन दिन पहले ही बिठूर थाने में स्थानांतरण किया था, लेकिन उसने अपनी रवानगी नहीं कराई थी। बताया जा रहा है कि वह किसी ‘गुडवर्क’ के जरिए अफसरों को खुश करके फिर से चौकी पाने की जुगत में था। मंगलवार को किशोरी का प्रकरण सामने आने और एफआईआर दर्ज होने के बाद वह फरार हो गया। बुधवार सुबह वह सचेंडी थाने पहुंचा और खुद को बिठूर थाने के लिए रिलीव भी करा लिया। घटना के बाद देर रात तक वह सचेंडी थाने में रहा और सुबह फिर पहुंचा, लेकिन जिम्मेदार उसे बचाने का प्रयास करते रहे। इसी का नतीजा रहा कि वह फरार हो गया।
आगे की जांच और सरकारी निर्देश
मामले की जांच अब एडीसीपी पश्चिम कपिल देव सिंह को सौंपी गई है। उनकी जांच में प्रथम दृष्ट्या शिवबरन यादव और दरोगा अमित की भूमिका मिली है। जिसके बाद आरोपी अमित को हिरासत में लेकर पूछताछ चल रही है, जबकि दरोगा की तलाश में टीमें लगी हैं। मामले की गूंज सरकार तक भी पहुंची, जिसके बाद खुद डीजीपी ने इस प्रकरण पर जिम्मेदारों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए।
जनता पर प्रभाव
इस घटना ने एक बार फिर पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। नाबालिगों की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं और जनता में पुलिस के प्रति विश्वास को ठेस पहुंची है। इस तरह की लापरवाही न केवल पीड़ितों को न्याय मिलने में बाधा डालती है, बल्कि अपराधियों के हौसले भी बुलंद करती है।
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