कानपुर होली उत्सव: गंगा मेले को भव्य बनाने की मांग, जानिए कब होगा आयोजन
कानपुर शहर की सदियों पुरानी परंपरा, हटिया होली मेला, जिसे गंगा मेला भी कहा जाता है, इस वर्ष 10 मार्च को अनुराधा नक्षत्र के शुभ संयोग में धूमधाम से मनाया जाएगा। गंगा मेला कमेटी ने एक प्रेस वार्ता के दौरान आयोजन की विस्तृत रूपरेखा साझा की। इस वर्ष कमेटी ने इस ऐतिहासिक मेले को बिठूर महोत्सव की तर्ज पर “कानपुर होली उत्सव” के रूप में मनाए जाने की पुरजोर मांग उठाई है, ताकि इसकी भव्यता और प्रचार-प्रसार बढ़ सके।
आयोजन की तारीखों के अनुसार, होलिका दहन 2-3 मार्च की मध्यरात्रि को होगा। हालांकि, 3 मार्च को चंद्रग्रहण होने के कारण, रंगोत्सव का पर्व 4 मार्च को मनाया जाएगा। 85वां होली मेला अपने पारंपरिक स्वरूप में 10 मार्च को आयोजित होगा। सुबह 9:45 बजे पुलिस कमिश्नर और जिलाधिकारी द्वारा क्रांतिकारियों के शिलालेख पर पुष्पांजलि अर्पित करने के साथ मेले का आधिकारिक शुभारंभ किया जाएगा। इसके पश्चात, तिरंगा फहराया जाएगा और पुलिस (होमगार्ड) बैंड द्वारा राष्ट्रीय धुन बजाई जाएगी।
पारंपरिक रंग ठेला हटिया रज्जन बाबू पार्क से अपनी यात्रा शुरू करेगा और जनरलगंज, मेस्टन रोड, चौक, बिरहाना रोड, नयागंज सहित शहर के विभिन्न प्रमुख मार्गों से होते हुए पुनः पार्क में लौटेगा। कमेटी ने स्थानीय प्रशासन से जल संस्थान द्वारा तीन जेटिंग मशीनों की व्यवस्था, ठेला मार्ग से बिजली के तारों को हटाने, दोपहर 1 से 3 बजे तक जलापूर्ति सुनिश्चित करने, निर्बाध बिजली आपूर्ति और रंग ठेलों के लिए टैंकरों की व्यवस्था करने की मांग की है।
ठेला वापसी के बाद, दोपहर 1:00 बजे रज्जन बाबू पार्क और उसके आसपास के क्षेत्र की सफाई का कार्य किया जाएगा, ताकि शाम को लगने वाले मेले में आगंतुकों को किसी प्रकार की असुविधा न हो। पार्क में टूटे हुए डस्टबिन को बदलने और कूड़ेदानों की व्यवस्था को सुचारू बनाने पर भी जोर दिया गया है। ठेला जुलूस के मार्ग पर मौजूद बड़े-बड़े गड्ढों को भरने के लिए पैच वर्क की मांग की गई है, साथ ही कीटनाशक दवाओं का छिड़काव भी कराया जाएगा।
सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर, बाजारों की बंदी के दौरान पुलिस से लगातार गश्त करने का आग्रह किया गया है। बिरहाना रोड पर होने वाले मटकी फोड़ आयोजन को 30 मिनट के लिए विश्राम देने का अनुरोध किया गया है, ताकि रंग ठेलों का जुलूस बिना किसी बाधा के सकुशल संपन्न हो सके। पदाधिकारियों ने रंग खेलने वाले नागरिकों से छात्रों और परीक्षार्थियों पर रंग न डालने की विशेष अपील की है।
कमेटी ने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि कुछ व्यापारी गंगा मेला तक बाजार की बंदी का विरोध कर रहे हैं। इसके जवाब में, उन्होंने तर्क दिया कि अन्य राज्यों में भी विभिन्न क्षेत्रीय उत्सवों के दौरान बाजारों को एक सप्ताह तक बंद रखने की परंपरा है। इसलिए, गंगा मेला को भी इसके पारंपरिक स्वरूप में ही मनाया जाना चाहिए। इस अवसर पर संरक्षक मूलचन्द्र सेठ, अध्यक्ष ज्ञानेन्द्र विश्नोई, महामंत्री विनय सिंह, ऋषि तिवारी, कृतज्ञ तिवारी, प्रदीप मल्होत्रा सहित कई पदाधिकारी उपस्थित रहे।
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