कानपुर देहात: गुरु और मित्र से छल करने पर मिलती है दरिद्रता, Sudama Charitra से आचार्य ने दिया संदेश
कानपुर देहात के काशीपुर गांव स्थित हनुमान गढ़ी आश्रम में चल रहे श्री विष्णु महायज्ञ के अंतिम दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। इस दौरान श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन किया गया, जिसमें आचार्य आलोक मिश्र ने सुदामा चरित्र का वर्णन किया। आचार्य ने कहा कि संतोष सबसे बड़ा धन है, लेकिन असंतोष का फल सदैव अहितकारी होता है। उन्होंने कहा कि बाल्यावस्था में गुरुमाता के दिए चने अपने सखा श्री कृष्ण से छिपाकर खाने में सुदामा को दरिद्रता का दंश मिला।
आचार्य ने आगे बताया कि सुदामा निष्काम कर्मयोगी थे। उन्होंने कभी सुख-सुविधाओं या आर्थिक लाभ की कामना नहीं की। हालांकि, भगवान ने अपने भक्त को बिना मांगे ही सब कुछ प्रदान कर दिया। सुदामा की निष्काम भक्ति से उन्हें भगवान का साक्षात्कार और परमपद भी प्राप्त हुआ। इस मौके पर आचार्य रामदत्त दीक्षित ने वैदिक मंत्रों के साथ श्री विष्णु महायज्ञ में पूर्णाहुति कराई।
