कनाडा से भारत के लिए अच्छी खबर, व्यापार समझौते पर तेज हुई बातचीत
भारत और कनाडा के बीच दो साल से चले आ रहे कूटनीतिक तनाव के बीच व्यापार संबंधों को सुधारने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। कनाडा की विदेश मंत्री अनीता आनंद ने सोमवार को इस बात की पुष्टि करते हुए कहा कि दोनों देश व्यापार समझौते को आगे बढ़ाने के लिए तेजी से काम करने को उत्सुक हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ओटावा और नई दिल्ली अपने कूटनीतिक संबंधों को बेहतर बनाने की दिशा में कदम उठा रहे हैं।
यह अहम बयान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा शुरू किए गए ट्रेड वार के जवाब में कनाडा की नई विदेश नीति के दृष्टिकोण को दर्शाता है। कनाडा, जो अपनी अर्थव्यवस्था के बड़े हिस्से के लिए निर्यात पर निर्भर है, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच अपने व्यापारिक साझेदारों में विविधता लाने का प्रयास कर रहा है। कनाडा का 75 प्रतिशत से अधिक निर्यात अमेरिका को होता है, और आगामी यूएसएमसीए व्यापार समझौते की समीक्षा को देखते हुए, कनाडा अन्य देशों के साथ अपने व्यापारिक संबंधों को मजबूत करना चाहता है।
कनाडाई विदेश मंत्री का यह बयान दक्षिण अफ्रीका में हाल ही में संपन्न हुए जी-20 शिखर सम्मेलन के दौरान कनाडा के प्रधानमंत्री और भारत के प्रधानमंत्री के बीच हुई द्विपक्षीय वार्ता के बाद आया है। इस मुलाकात में दोनों नेताओं ने एक नए व्यापार समझौते के लिए वार्ता फिर से शुरू करने पर सहमति व्यक्त की थी। अनीता आनंद ने एक साक्षात्कार में बताया कि दोनों देशों के नेताओं ने इस प्रक्रिया को जल्द से जल्द आगे बढ़ाने पर जोर दिया है। कनाडाई प्रधानमंत्री अगले वर्ष भारत की यात्रा करने की योजना बना रहे हैं, जो द्विपक्षीय संबंधों में एक नए अध्याय की शुरुआत का संकेत देता है।
यह ध्यान देने योग्य है कि कनाडा और भारत के बीच संबंध पिछले साल जून 2023 में तब तनावपूर्ण हो गए थे, जब कनाडा ने वैंकूवर में खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में भारत का हाथ होने का आरोप लगाया था। इस आरोप के बाद दोनों देशों के बीच व्यापार वार्ता सहित कई द्विपक्षीय सहयोग निलंबित हो गए थे।
हालांकि, हाल के घटनाक्रम बताते हैं कि दोनों देश अपने मतभेदों को दूर कर आगे बढ़ने के लिए तैयार हैं। भारत ने कनाडा में खालिस्तान जनमत संग्रह कराने पर अपनी कड़ी आपत्ति जताई है, लेकिन साथ ही यह भी माना है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनों का अधिकार है। भारत ने कनाडा से यह समझने का आग्रह किया है कि ऐसे कदम भारत पर क्या प्रभाव डाल सकते हैं। कनाडा के विदेश मंत्री के बयान से लगता है कि ओटावा भारत की इन चिंताओं को समझ रहा है और द्विपक्षीय संबंधों को प्राथमिकता दे रहा है।
