किशनगंज विधानसभा चुनाव: कांग्रेस और भाजपा में सीधा मुकाबला, महिला मतदाताओं ने बढ़ाई उत्सुकता
किशनगंज विधानसभा सीट पर इस बार चुनावी रण बेहद दिलचस्प हो गया है, जहाँ कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के बीच सीधा और कड़ा मुकाबला देखने को मिल रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस को यहाँ हल्की बढ़त मिल सकती है, लेकिन मतदान के बदलते पैटर्न ने सभी समीकरणों को उलझा दिया है।
इस चुनाव में किशनगंज विधानसभा क्षेत्र में लगभग 80 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया है, जो पिछले चुनावों की तुलना में काफी अधिक है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस बार महिला मतदाताओं की भागीदारी पुरुषों से कहीं अधिक रही है। जहाँ पुरुष मतदाताओं का प्रतिशत 73.85 दर्ज किया गया, वहीं 86.92 प्रतिशत महिलाओं ने मतदान कर अपनी राजनीतिक चेतना का प्रदर्शन किया। महिला मतदाताओं की इस भारी संख्या ने नतीजों को लेकर लगाई जा रही सभी अटकलों को और तेज कर दिया है।
चुनाव परिणामों को प्रभावित करने वाला एक अन्य महत्वपूर्ण कारक असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआइएमआइएम (AIMIM) है। वर्ष 2020 के विधानसभा चुनाव में एआइएमआइएम को इस सीट से 41 हजार से अधिक वोट मिले थे। इन वोटों का सीधा नुकसान भाजपा को हुआ था, जहाँ भाजपा प्रत्याशी स्वीटी सिंह मात्र 1300 वोटों के मामूली अंतर से चुनाव हार गई थीं। उस समय एआइएमआइएम ने कांग्रेस के वोटों में सेंध लगाकर भाजपा को अप्रत्यक्ष रूप से फायदा पहुँचाया था।
हालांकि, इस बार स्थिति थोड़ी भिन्न दिख रही है। अगर एआइएमआइएम इस चुनाव में भी अच्छी संख्या में वोट हासिल करती है, तो राजनीतिक पंडितों का मानना है कि इसका सीधा फायदा भाजपा को मिल सकता है। महिला मतदाताओं की बढ़ी हुई संख्या और एआइएमआइएम की भूमिका, दोनों ही इस सीट पर नतीजों को अप्रत्याशित बना रहे हैं। अब सभी की निगाहें मतगणना पर टिकी हैं, जहाँ यह स्पष्ट होगा कि किशनगंज की जनता ने किस पार्टी को अपना जनादेश दिया है।
