किसान बरतें सावधानी: आलू-गेहूं की बोआई के लिए तापमान पर रखें पैनी नजर
देश भर के किसान इन दिनों रबी की फसलों की बुआई में जुटे हुए हैं, खासकर आलू और गेहूं की। हालांकि, इस वर्ष मौसमी परिस्थितियों ने किसानों के लिए कुछ चुनौतियां पेश की हैं। देर तक बरसे मानसून और बदलते मौसम के मिजाज के कारण धान की कटाई में देरी हुई है, जिसका सीधा असर आलू और गेहूं की बुआई के समय पर पड़ा है। कृषि विज्ञानियों ने किसानों को सलाह दी है कि वे बुआई के समय तापमान पर विशेष नजर रखें, ताकि फसल को नुकसान से बचाया जा सके और बेहतर उत्पादन प्राप्त हो सके।
विशेषज्ञों के अनुसार, आलू की बुआई के लिए अक्टूबर का मध्य से नवंबर का पहला सप्ताह सबसे उपयुक्त समय माना जाता है। लेकिन इस बार देरी से धान की कटाई होने के कारण कई किसान अभी भी बुआई कर रहे हैं। कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि 20 नवंबर के बाद आलू की बुआई करने वाले किसानों को मौसम की चाल पर पैनी नजर रखने की आवश्यकता है। आलू की बुआई के लिए दिन का तापमान 18 डिग्री सेल्सियस और रात का तापमान 9 डिग्री सेल्सियस से ऊपर रहना अनुकूल होता है। यदि लगातार तीन से चार दिनों तक दिन का अधिकतम तापमान 18 डिग्री से नीचे और रात का तापमान 9 डिग्री से नीचे चला जाता है, तो बुआई से बचना चाहिए। यह समय आलू के कंदों के विकास के लिए महत्वपूर्ण होता है, और अत्यधिक ठंड कंदों के विकास को बाधित कर सकती है।
वहीं, गेहूं की बुआई के लिए भी तापमान एक महत्वपूर्ण कारक है। कृषि विशेषज्ञों की मानें तो 20 से 25 डिग्री सेल्सियस के बीच का तापमान गेहूं की बुआई के लिए आदर्श है। हालांकि, कम तापमान में भी गेहूं अंकुरित हो सकता है, लेकिन इससे फसल को अपनी पूरी क्षमता से बढ़ने का मौका नहीं मिल पाता, जिसका असर अंततः उपज पर पड़ता है।
चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के शाक-भाजी उत्कृष्टता केंद्र के एक आलू विज्ञानी के अनुसार, कानपुर क्षेत्र के लिए आलू की कई उन्नत किस्में उपलब्ध हैं, जिनका चयन किसान अपनी आवश्यकतानुसार कर सकते हैं। इनमें कुफरी बहार, कुफरी पुष्कर, कुफरी सिंदूरी और कुफरी चिप्सोना जैसी किस्में शामिल हैं, जो चिप्स बनाने, सामान्य उपयोग या जल्दी तैयार होने वाली फसल के लिए उपयुक्त हैं। उन्होंने यह भी बताया कि अभी भी देर से उगाई जाने वाली आलू की प्रजातियों की बुआई की जा सकती है और वर्तमान मौसम आलू की खेती के लिए अभी भी अनुकूल बना हुआ है, बशर्ते तापमान की स्थिति सामान्य बनी रहे। किसानों को सलाह दी जाती है कि वे अपने स्थानीय मौसम विभाग के पूर्वानुमानों पर ध्यान दें और विशेषज्ञों की सलाह का पालन करें।
