केजीबी विद्यालयों में मिड-डे-मील की गुणवत्ता की जांच करेगी समिति
कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों में पढ़ने वाली छात्राओं के स्वास्थ्य और पोषण को सुनिश्चित करने के लिए अब मिड-डे-मील की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। शासन के निर्देशानुसार, जिलाधिकारी द्वारा एक विशेष समिति का गठन किया गया है, जिसे इन विद्यालयों में परोसे जा रहे मध्याह्न भोजन (मिड-डे-मील) की गुणवत्ता की जांच का जिम्मा सौंपा गया है। यह समिति नियमित रूप से विद्यालयों का निरीक्षण करेगी, भोजन और उसमें इस्तेमाल होने वाले खाद्य पदार्थों के नमूने एकत्र करेगी और उनकी जांच कराएगी।
सूत्रों के अनुसार, यदि जांच रिपोर्ट में भोजन की गुणवत्ता मानकों के अनुरूप नहीं पाई जाती है, तो संबंधित विद्यालय की वार्डन और स्टाफ के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इस कदम का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पीएम पोषण योजना के तहत छात्राओं को पौष्टिक और गुणवत्तापूर्ण भोजन मिले, जैसा कि योजना का मूल उद्देश्य है।
वर्तमान में, बेसिक शिक्षा विभाग के अधीन जिले में तीन कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय संचालित हैं। इन विद्यालयों में गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की लगभग 300 छात्राएं कक्षा छह से आठवीं तक की शिक्षा प्राप्त कर रही हैं। इन सभी छात्राओं के भोजन और रहने का पूरा खर्च शासन द्वारा वहन किया जाता है। उन्हें प्रतिदिन मेन्यू के अनुसार नाश्ता और भोजन उपलब्ध कराया जाता है।
मिड-डे-मील में उपयोग होने वाले खाद्य पदार्थों में किसी भी प्रकार की मिलावट को रोकने और भोजन की गुणवत्ता को बनाए रखने के लिए यह नियमित जांच अभियान चलाया जा रहा है। इसका सीधा असर छात्राओं के स्वास्थ्य पर पड़ेगा, जिससे वे बेहतर पोषण प्राप्त कर सकेंगी और अपनी पढ़ाई पर अधिक ध्यान केंद्रित कर सकेंगी। शिक्षा विभाग इस पहल को छात्राओं के समग्र विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बता रहा है।
