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कानपुर में वकील के पार्क की जमीन आवंटन की जांच के लिए बनी कमेटी

By Nov 24, 2025

कानपुर में वकील अखिलेश दुबे से जुड़े पार्क की जमीन के आवंटन प्रकरण में शासन ने संज्ञान लेते हुए एक दो सदस्यीय जांच समिति का गठन किया है। यह कार्रवाई इलाहाबाद उच्च न्यायालय के एक महत्वपूर्ण आदेश के बाद की गई है, जिसमें कानपुर विकास प्राधिकरण (केडीए) पर पार्क के लिए आरक्षित जमीन पर अवैध कब्जे को लेकर लापरवाही बरतने का आरोप लगाया गया था।

जानकारी के अनुसार, इलाहाबाद उच्च न्यायालय में सौरभ भदौरिया द्वारा दाखिल की गई एक जनहित याचिका में यह मुद्दा उठाया गया था। याचिका में कहा गया था कि जूही कलां, साकेत नगर की स्कीम दो, ब्लॉक डब्ल्यू-1 स्थित प्लांट संख्या 559 को मूल रूप से पार्क के लिए सुरक्षित रखा गया था। हालांकि, केडीए ने इस पार्क के रखरखाव की जिम्मेदारी एक निजी स्कूल को 10 साल के लिए सौंप दी थी। अवधि समाप्त होने के बाद भी पार्क पर कथित तौर पर अवैध कब्जा बना रहा, जिस पर न्यायालय ने चिंता व्यक्त की।

न्यायालय ने इस बात पर भी सवाल उठाया कि इस मामले में जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ अब तक क्या कार्रवाई की गई है, इसकी जानकारी नहीं दी गई। कोर्ट ने स्पष्ट आदेश दिया है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।

इस जांच की जिम्मेदारी आवास सचिव बलकार सिंह और विशेष सचिव राजेश राय को सौंपी गई है, जो इस दो सदस्यीय समिति के सदस्य होंगे। जांच टीम को अपनी रिपोर्ट प्रमुख सचिव को चार सप्ताह के भीतर सौंपनी होगी। इसके बाद, प्रमुख सचिव को दो सप्ताह के भीतर दोषी अधिकारियों पर की गई कार्रवाई का विवरण हलफनामे के साथ न्यायालय को प्रस्तुत करना होगा।

इस प्रकरण से संबंधित मामले की अगली सुनवाई की तारीख 5 जनवरी, 2026 नियत की गई है। केडीए सचिव अभय पांडेय ने इस संबंध में पुष्टि करते हुए बताया कि दो सदस्यीय कमेटी गठित कर दी गई है और प्राधिकरण आवश्यक दस्तावेज तैयार करा रहा है।

यह भूखंड, जिसका क्रमांक 559, ब्लॉक डब्ल्यू-एक, योजना संख्या-दो, जूही कलां है, 1.11 एकड़ (लगभग 1860 वर्गमीटर) क्षेत्रफल में फैला है और इसका भू-उपयोग पार्क के रूप में दर्ज है। इसका आवंटन डॉ. ब्रिजकिशोरी दुबे मेमोरियल स्कूल को 15 सितंबर 1998 को तत्कालीन मुख्य अभियंता द्वारा केवल 10 वर्ष के अनुरक्षण के लिए किया गया था, जिसकी अवधि वर्ष 2008 में समाप्त हो गई थी। इसके बाद केडीए ने इसका नवीनीकरण नहीं किया।

नवीनीकरण न होने के कारण, पार्क की जमीन पर अनाधिकृत रूप से मकान और अन्य निर्माण कार्य होने लगे। इस अनियमितता के संज्ञान में आने पर, केडीए ने उत्तर प्रदेश नगर नियोजन एवं विकास अधिनियम 1973 की धारा 26 (क) 4 के तहत सरकारी भूमि पर हुए अनाधिकृत निर्माणों को हटाने के लिए वाद दायर किया था और 19 जुलाई, 2025 को कारण बताओ नोटिस जारी किया था।

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