झुग्गी की महिलाओं ने बदली किस्मत, छत पर उगाई सब्जियां बनी प्रेरणा
दिल्ली की झुग्गी बस्तियों में रहने वाली महिलाएं अब ताजी सब्जियां उगाकर अपनी जिंदगी में सकारात्मक बदलाव ला रही हैं। 17 वर्षीय राघव राय की एक अनूठी पहल से प्रेरित होकर, लगभग 40 से अधिक परिवार अपने घरों की छतों और बालकनी को हरे-भरे सब्जी के बागों में बदल रहे हैं। इस पहल का नाम ‘बस्ती गार्डन्स ऑफ होप’ है, जो इन परिवारों को पोषण और आत्मनिर्भरता की ओर ले जा रही है।
निजामुद्दीन झुग्गी बस्ती की निवासी परवीन बताती हैं कि घर में उगी ताजी सब्जियों का स्वाद बाजार से खरी सब्जियों से बिल्कुल अलग होता है। साथ ही, इससे सब्जियों पर होने वाला खर्च भी काफी कम हो गया है। पिछले दो वर्षों से, उनके समुदाय के लगभग 40 घर अपनी जरूरत की अधिकांश हरी सब्जियां खुद ही उगा रहे हैं।
यह परिवर्तन 17 वर्षीय राघव राय की मेहनत और लगन का परिणाम है। उन्होंने साबित कर दिया है कि जैविक खेती के लिए विशाल भूमि की आवश्यकता नहीं है; इसे घर की छोटी सी जगह, जैसे छत या बालकनी में भी सफलतापूर्वक अपनाया जा सकता है। राघव राय ने निजामुद्दीन के स्लम क्षेत्र को सब्जियों के हरे-भरे बाग में बदलने का सपना देखा और उसे साकार किया है।
राघव राय, जो निजामुद्दीन वेस्ट के निवासी हैं, बताते हैं कि उन्होंने अक्टूबर 2023 में अपने घर के किचन गार्डन से प्रेरणा लेकर इस मुहिम की शुरुआत की थी। पिछले दो वर्षों में, यह मुहिम सराय काले खां, आली गांव, कुसुमपुर पहाड़ी, खान बस्ती और रोहिणी बस्ती जैसे इलाकों तक फैल गई है, जिससे 40 से अधिक परिवार जुड़ चुके हैं। ये परिवार अपने छतों पर किचन गार्डनिंग के माध्यम से न केवल पोषण, बल्कि खुशहाली भी उगा रहे हैं।
सिलाई सेंटर में काम करने वाली अफरोज़ जमाल का कहना है कि उनके घर के छोटे से बाल्टी गार्डन से अब करेला, टमाटर, पालक, लौकी और मिर्च जैसी सब्जियां इतनी उग जाती हैं कि रोजाना खाने में काम आ सकें। इससे उनकी पैसों की बचत हो रही है। यह सब ‘बस्ती गार्डन्स ऑफ होप’ की वजह से संभव हो पाया है, जो परिवारों को हरी सब्जी खुद उगाने में मदद करती है। राघव की इस मुहिम से प्रेरित होकर कई स्थानीय लोग, विशेषज्ञ और सामाजिक संस्थाएं भी आगे आकर मदद कर रही हैं।
‘बस्ती गार्डन्स ऑफ होप’ परिवारों को बीज, मिट्टी, खाद और ग्रो-बैग जैसी आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराती है। इसके अलावा, संस्था हफ्ते में एक बार बागवानी, खाद बनाने की विधि और मिट्टी की सेहत पर कार्यशालाएं भी आयोजित करती है। आज, इन बस्तियों की महिलाएं अपने-अपने इलाकों में समुदाय की बागवानी विशेषज्ञ बन गई हैं, जो न केवल अपने परिवार के लिए बल्कि दूसरों के लिए भी प्रेरणास्रोत हैं।
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