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जंगली जानवरों का आतंक और कोल्ड स्टोरेज का अभाव: तिलौथू के किसानों ने छोड़ी आलू की खेती

By Nov 2, 2025

संवाद सूत्र, तिलौथू (रोहतास)। रोहतास जिले के तिलौथू प्रखंड में कभी बड़े पैमाने पर होने वाली आलू की खेती अब बीते दिनों की बात होती जा रही है। जंगली जानवरों के बढ़ते आतंक और उत्पादित फसल को सुरक्षित रखने के लिए कोल्ड स्टोरेज की घोर कमी ने किसानों को आलू की खेती से मुंह मोड़ने पर मजबूर कर दिया है। किसान अब नुकसान से बचने के लिए अन्य फसलों की ओर रुख कर रहे हैं, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति पर भी गहरा असर पड़ रहा है।

प्रखंड क्षेत्र में पहले आलू, गन्ना जैसी नगदी फसलें किसानों की आय का प्रमुख स्रोत थीं। इन व्यावसायिक फसलों से किसान अपनी कई जरूरतों को पूरा करते थे, जिसमें आलू की खेती को प्राथमिकता दी जाती थी। लेकिन, पिछले कुछ वर्षों से जंगली जानवरों के झुंड खेतों में घुसकर तैयार फसलों को चौपट कर रहे हैं। अपनी फसल को सुरक्षित रख पाने के समुचित संसाधनों के अभाव में किसान प्रतिवर्ष भारी नुकसान उठा रहे हैं, जिससे आलू की खेती अब घाटे का सौदा बन चुकी है।

किसानों की दूसरी सबसे बड़ी समस्या आलू के भंडारण की है। पूरे प्रखंड क्षेत्र में वर्तमान में एक भी कोल्ड स्टोरेज नहीं है। बाबूगंज, रामडिहरा, सोनरा, महाराजगंज, ककाली बीघा, पड़रिया जैसे दर्जनों गांवों में पांच साल पहले तक व्यापक पैमाने पर आलू की अच्छी पैदावार होती थी, लेकिन अब इन गांवों में इक्का-दुक्का किसान ही आलू की खेती करते नजर आते हैं। किसान रामजी सिंह, ललन महतो और प्रदीप कुमार जैसे कई किसानों का कहना है कि अगर क्षेत्र में कोल्ड स्टोरेज होता, तो वे उत्पादित आलू को उचित मूल्य मिलने तक सुरक्षित रख सकते थे। लेकिन, भंडारण सुविधा न होने के कारण आलू को खेत से निकलते ही व्यापारियों के हाथों औने-पौने दाम पर बेचना पड़ता है, क्योंकि अधिक समय तक बाहर रखने पर आलू खराब हो जाता है।

इस गंभीर स्थिति को देखते हुए प्रखंड के किसानों ने हाल ही में नवपदस्थापित प्रखंड कृषि पदाधिकारी अमरनाथ मिश्रा से मुलाकात की। किसानों ने जंगली जानवरों के आतंक से निजात दिलाने और कोल्ड स्टोरेज जैसी बुनियादी सुविधाओं को उपलब्ध कराने की मांग की है, ताकि वे अपनी पारंपरिक और लाभदायक खेती को फिर से अपना सकें। रामदेवरा के एक किसान रामजी सिंह, जिन्होंने अभी भी आलू की खेती की है, वे भी भविष्य को लेकर चिंतित हैं। किसानों का कहना है कि यदि सरकार या स्थानीय प्रशासन इस ओर ध्यान नहीं देता है, तो आने वाले समय में तिलौथू प्रखंड से आलू की खेती पूरी तरह से समाप्त हो जाएगी, जिससे किसानों को बड़ा आर्थिक संकट झेलना पड़ सकता है।

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