जंबूरी में पर्यावरण संरक्षण की अनोखी पाठशाला: वेस्ट से बना रहे वंडर
लखनऊ में भारत स्काउट्स और गाइड्स की 19वीं राष्ट्रीय जंबूरी, जो आमतौर पर कैंपिंग और एडवेंचर के लिए जानी जाती है, इस बार पर्यावरण संरक्षण की एक अनूठी पाठशाला बन गई है। यहां 35 हजार से अधिक स्काउट्स-गाइड्स और देश-विदेश से आए स्वयंसेवक कचरा प्रबंधन और उसके पुन: उपयोग के गुर सीख रहे हैं।
जंबूरी में पहली बार डिपॉजिट रिफंड सिस्टम (डीआरएस) को सफलतापूर्वक लागू किया गया है, जिससे आयोजन स्थल पर उत्पन्न होने वाले कचरे का तत्काल प्रबंधन सुनिश्चित हो रहा है। डिफेंस एक्सपो ग्राउंड में 350 एकड़ में फैले इस अस्थायी टेंट सिटी में, स्काउट्स-गाइड्स सुबह से शाम तक खाली प्लास्टिक की बोतलें और चिप्स व बिस्कुट के पैकेट जैसी सामग्री एकत्र करते देखे जा रहे हैं। वे न केवल अपना कचरा जमा कर रहे हैं, बल्कि परिसर में बिखरे प्लास्टिक को भी उठाकर विशेष रिवर्स वेंडिंग मशीनों में डाल रहे हैं।
इन मशीनों से प्राप्त रिवार्ड कूपन बच्चों के लिए एक बड़ी प्रेरणा हैं। इन कूपनों के बदले उन्हें खास ‘ईको-गिफ्ट’ मिलते हैं, जिनमें से कुछ ऐसे हैं जिन्हें मिट्टी में दबाने पर पौधा उग आता है। सूत्रों के अनुसार, 23 से 27 नवंबर के बीच एक लाख 20 हजार से अधिक कूपन बांटे जा चुके हैं, जो प्लास्टिक की बोतलों और रैपरों के विशाल संग्रह का प्रमाण है।
स्टार्टअप सर्कुलोजी के संस्थापक सईम रिजवी के अनुसार, टेंट सिटी में दो स्तरों पर अपशिष्ट प्रबंधन का कार्य चल रहा है। प्लास्टिक कचरे को मशीनों के माध्यम से तत्काल रीसाइक्लिंग के लिए भेजा जा रहा है, जबकि खाने-पीने के बचे हुए अवशेषों से लगभग 300 किलोग्राम जैविक खाद तैयार की गई है। इस प्रक्रिया से स्काउट्स-गाइड्स अपशिष्ट प्रबंधन के वैज्ञानिक तरीकों को सीधे अनुभव कर रहे हैं।
इसके अतिरिक्त, जंबूरी परिसर में लगे बड़े फ्लैक्स बैनरों को भी बेकार नहीं जाने दिया जा रहा है। इनसे उपयोगी बैग बनाए जा रहे हैं। 12वीं की छात्रा चांदनी ने बताया कि उन्होंने चिप्स के पैकेट से सुंदर बैग बनाना सीखा है, जिसे देखकर लोग हैरान हैं कि ऐसी सामग्री से भी इतनी कलात्मक चीजें बनाई जा सकती हैं।
स्काउट्स और गाइड्स के प्रादेशिक मुख्यायुक्त डॉ. प्रभात कुमार ने बताया कि ‘वेस्ट से वंडर’ थीम के तहत बच्चों ने कई आकर्षक वस्तुएं बनाना शुरू कर दिया है। जंबूरी के समापन पर, सर्वश्रेष्ठ 10 ‘वंडर आइटम’ बनाने वाले प्रतिभागियों को सम्मानित किया जाएगा और इन अनूठी कृतियों की एक प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी।
जंबूरी में अपनाया गया यह व्यापक और वैज्ञानिक अपशिष्ट प्रबंधन प्रणाली आयोजन को एक नई पहचान दे रहा है। यह एक जीवंत उदाहरण है कि कैसे बड़ी आबादी वाली किसी भी अस्थायी बस्ती में प्रभावी कचरा प्रबंधन को तुरंत लागू किया जा सकता है। बच्चों का उत्साह, उनकी सीखने की ललक और पर्यावरण के प्रति उनकी जागरूकता यह दर्शाती है कि जंबूरी केवल एक प्रशिक्षण कार्यक्रम नहीं, बल्कि भविष्य के संवेदनशील और जिम्मेदार नागरिक तैयार करने का एक सशक्त माध्यम बन गई है।
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