जमरानी बांध प्रभावितों को हल्द्वानी में मिलेगा नया घर, किच्छा में बसाहट की तैयारी
उत्तराखंड में जमरानी बांध परियोजना के निर्माण के कारण विस्थापित होने वाले छह गांवों के लोगों के लिए हल्द्वानी के निकट किच्छा के गडरियाबाग में नया आशियाना तैयार किया जा रहा है। प्रभावित परिवारों को बेहतर जीवन स्तर प्रदान करने के उद्देश्य से सरकार ने इस योजना को अंतिम रूप दिया है। यह परियोजना न केवल विस्थापितों के पुनर्वास की चिंता करती है, बल्कि क्षेत्र में विकास और रोजगार के नए अवसर भी खोलेगी।nnजिन छह गांवों के ग्रामीणों को अपनी पुश्तैनी जमीन और घर बांध परियोजना के लिए देने पड़े हैं, उन्हें किच्छा के गडरियाबाग (प्राग फार्म के पास) में बसाया जाएगा। इसके लिए लगभग 300 एकड़ भूमि का अधिग्रहण किया गया है, जिस पर मास्टर प्लान के तहत आवश्यक सुविधाओं का विकास कार्य जारी है। इस योजना के तहत, ए श्रेणी के 213 परिवारों, जिनके घर और जमीन दोनों बांध में समा जाएंगे, उन्हें एक एकड़ खेती योग्य भूमि के साथ-साथ मकान बनाने के लिए 200 वर्ग मीटर का भूखंड मिलेगा। वहीं, बी श्रेणी के 821 लोग, जिनकी केवल जमीन जा रही है, उन्हें नकद मुआवजा दिया गया है।nnपुनर्वास स्थल पर मूलभूत सुविधाओं के विकास के साथ-साथ सड़क संपर्क को लेकर एक महत्वपूर्ण मसला सामने आया है। किच्छा के गडरियाबाग में हाईवे के किनारे रेलवे ट्रैक होने के कारण, नए बसाहट स्थल तक पहुंचने के लिए लगभग आधा किलोमीटर लंबी और 18 मीटर चौड़ी सड़क का निर्माण प्रस्तावित है। इस सड़क के निर्माण के लिए राजस्व विभाग की सहमति आवश्यक है, क्योंकि प्रस्तावित भूमि का स्वामित्व राजस्व विभाग के पास है। जमरानी परियोजना के अधिकारियों ने इस संबंध में राजस्व विभाग को पत्र भेजकर सहमति मांगी है, ताकि निर्माण कार्य शुरू हो सके।nnपरियोजना प्रबंधक के अनुसार, वर्तमान में बुलडोजर और अन्य भारी मशीनों के आने-जाने के लिए केवल पांच मीटर चौड़ा रास्ता उपलब्ध है, जो भविष्य की बड़ी मशीनों के आवागमन के लिए अपर्याप्त साबित होगा। मास्टर प्लान के अनुसार भी यह मौजूदा रास्ता संकरा है। इसलिए, प्रस्तावित नई सड़क का निर्माण भविष्य की जरूरतों और मास्टर प्लान के अनुरूप आवश्यक है। एसडीएम किच्छा ने बताया कि मामले का परीक्षण किया जा रहा है और सहमति मिलने के बाद ही प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।nnजमरानी बांध परियोजना, जो क्षेत्र के विकास के लिए महत्वपूर्ण है, अब प्रभावितों के पुनर्वास की दिशा में एक बड़ा कदम उठा रही है। उम्मीद है कि जल्द ही सड़क निर्माण की बाधा दूर होगी और विस्थापित परिवारों को उनके नए घर मिल सकेंगे।”
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घर मिल सकेंगे।
