जम्मू-कश्मीर: अमोनियम नाइट्रेट विस्फोट में तरल मिश्रण की भूमिका की जांच
श्रीनगर के नौगाम पुलिस स्टेशन में पिछले सप्ताह हुए 360 किलोग्राम अमोनियम नाइट्रेट के विस्फोट में एक संदिग्ध तरल विस्फोटक मिश्रण की भूमिका होने का अंदेशा जताया जा रहा है। जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार, प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि जिस अमोनियम नाइट्रेट की जांच की जा रही थी, वह संभवतः तरल विस्फोटक के एक अस्थिर मिश्रण के कारण फटा।
प्रारंभिक निष्कर्षों से पता चलता है कि यह विस्फोट तब हुआ जब जब्त किए गए अमोनियम नाइट्रेट के नमूनों का अंतिम सेट लिया जा रहा था। इस धमाके में नौ पुलिसकर्मियों की जान चली गई और 30 से अधिक लोग घायल हो गए।
सूत्रों का कहना है कि जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े मॉड्यूल के पास अमोनियम नाइट्रेट उपकरण को सक्रिय करने के लिए आवश्यक शॉकवेव उत्पन्न करने में सक्षम मानक डेटोनेटर उपलब्ध नहीं थे। ऐसे में, उन्होंने कथित तौर पर हाइड्रोजन पेरोक्साइड और एसीटोफेनोन के तरल मिश्रण का सहारा लिया। यह मिश्रण, जिसका उपयोग आमतौर पर द्वितीयक ट्रिगर के रूप में किया जाता है, अब फोरेंसिक जांच के लिए रखे गए बड़े भंडार को सक्रिय करने का संदिग्ध कारण माना जा रहा है।
अधिकारियों का यह भी मानना है कि जांच क्षेत्र के अंदर तेज रोशनी से गर्मी का स्तर बढ़ गया हो सकता है, जिसने विस्फोट में योगदान दिया हो। हालांकि, अंतिम निष्कर्ष केंद्रीय फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (CFSL) के विशेषज्ञों और राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (NSG) के बम निरोधक दस्ते की रिपोर्ट पर निर्भर करेगा, जो अभी भी मलबे की जांच कर रहे हैं।
फिलहाल, जम्मू-कश्मीर पुलिस ने किसी भी आतंकवादी साजिश की आशंका को खारिज कर दिया है और इसे नियमित नमूनाकरण के दौरान हुई एक आकस्मिक विस्फोट बताया है। यह विस्फोट शुक्रवार देर रात नौगाम पुलिस स्टेशन में हुआ, जिससे इमारत लगभग तुरंत ढह गई। विस्फोट के कारण खड़ी गाड़ियां भी आग की चपेट में आ गईं और मलबा व मानव अंग 300 फीट तक दूर जा गिरे।
घायलों में से कई की हालत गंभीर बनी हुई है, और बचाव दल अभी भी लापता लोगों की तलाश कर रहे हैं। यह विस्फोटक सामग्री फरीदाबाद मॉड्यूल मामले में जब्त की गई थी, जो डॉ. मुज़म्मिल शकील गनाई नामक व्यक्ति के किराए के मकान से बरामद हुई थी। गनाई को ‘व्हाइट-कॉलर’ आतंकी मॉड्यूल मामले में गिरफ्तार किए गए आठ लोगों में से एक बताया जा रहा है।
विस्फोट तब हुआ जब मजिस्ट्रेट की उपस्थिति में सामग्री का दस्तावेजीकरण और सीलिंग की जा रही थी। जैश-ए-मोहम्मद से जुड़ी एक छाया इकाई PAFF ने इस विस्फोट की जिम्मेदारी का दावा किया था, लेकिन पुलिस महानिदेशक नलिन प्रभात ने इस दावे को अटकलबाजी करार देते हुए खारिज कर दिया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यह विस्फोट ‘आकस्मिक’ था और जब्त स्टॉक को संभालते समय हुआ।
