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जीजा की हथौड़े से निर्मम हत्या, साले और दोस्तों ने रची खूनी साजिश, एक फरार

By Nov 30, 2025

किशनगंज, बिहार। भारत-नेपाल सीमा से सटे दिघलबैंक प्रखंड में शिक्षक महबूब आलम की निर्मम हत्या के मामले में पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। पुलिस की जांच में सामने आया है कि यह हत्या जमीन के कारोबार से जुड़े विवाद में की गई थी और इसमें मृतक के साले की भी संलिप्तता थी, जो घटना के बाद विदेश भाग गया है।

जानकारी के अनुसार, हल्दावन निवासी महबूब आलम, जो पेशे से शिक्षक थे और जमीन का कारोबार भी करते थे, 21 सितंबर को दलखोला जाने की बात कहकर घर से निकले थे, लेकिन वापस नहीं लौटे। उनकी पत्नी जोसनेरा खातून ने 14 अक्टूबर को दिघलबैंक थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पुलिस ने पत्नी के आवेदन पर मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी।

पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर गठित विशेष टीम ने गहन अनुसंधान, आसूचना संकलन और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर मामले की जांच की। जांच के क्रम में पिपला निवासी मनारूल हक को गिरफ्तार किया गया। पूछताछ के दौरान मनारूल हक ने हत्या में अपनी संलिप्तता स्वीकार की और घटना में शामिल अपने तीन अन्य साथियों के नाम भी बताए। गिरफ्तार आरोपियों में मनारूल हक (38), इरफान (25) और मोकिम (29) शामिल हैं, जो सभी दिघलबैंक थाना क्षेत्र के निवासी हैं।

पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि 21 सितंबर को महबूब आलम अपने साले दरास और तीन अन्य दोस्तों के साथ जमीन के काम से पूर्णिया गए थे। वापसी के दौरान स्विफ्ट कार (बीआर37 एडी 9028) में ही महबूब आलम पर हथौड़े से हमला कर उसकी हत्या कर दी गई। अपराध को छिपाने के लिए शव को पिपला के एक खेत में दफना दिया गया था, जिसे बाद में पुलिस ने बरामद किया।

इस खूनी खेल में मृतक का साला दरास भी शामिल था, जो वारदात को अंजाम देने के बाद ओमान भाग गया है। पुलिस उसकी तलाश में जुटी हुई है। गिरफ्तार किए गए तीन आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। इस कांड के उद्भेदन में एसडीपीओ, अंचल निरीक्षक, थाना अध्यक्षों और कई पुलिस अधिकारियों व जवानों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

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