घुटने की सर्जरी के लिए बीमा कवरेज: रोबोटिक प्रत्यारोपण पर कितना मिलेगा लाभ?
नई दिल्ली। घुटनों की समस्या अब केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं है। आर्थराइटिस, खेल चोटों, मोटापे और बदलती जीवनशैली के कारण युवा और मध्यम आयु वर्ग में भी घुटने की सर्जरी के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। ऐसे में मरीजों के लिए पारंपरिक और रोबोटिक सर्जरी के बीच चयन तथा इसके खर्च और बीमा कवरेज को समझना महत्वपूर्ण हो जाता है।
पारंपरिक घुटना प्रत्यारोपण सर्जरी एक मैन्युअल प्रक्रिया है, जिसमें सर्जन अपने अनुभव और पारंपरिक उपकरणों का उपयोग करता है। यह तकनीक दशकों से प्रमाणित है और लगभग सभी बड़े अस्पतालों में उपलब्ध है। भारत में इसकी शुरुआती लागत ₹1.8 लाख से ₹3.5 लाख तक हो सकती है।
दूसरी ओर, रोबोटिक घुटना सर्जरी में कंप्यूटर-नियंत्रित रोबोटिक सिस्टम सर्जन की सहायता करता है, जिससे इम्प्लांट को अधिक सटीकता से लगाया जा सकता है। इसके फायदों में बेहतर अलाइनमेंट, कम टिश्यू डैमेज, ऑपरेशन के बाद कम दर्द और जल्दी ठीक होना शामिल है। हालांकि, इसकी लागत ₹3.5 लाख से ₹6.5 लाख तक हो सकती है।
बीमा कवरेज की बात करें तो, अधिकांश हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी घुटने की सर्जरी को कवर करती हैं, बशर्ते वह चिकित्सकीय रूप से आवश्यक हो। समस्या तब आती है जब बीमा कंपनियां रोबोटिक सर्जरी को ‘नवीन या आधुनिक उपचार’ मानकर अतिरिक्त खर्चों पर सब-लिमिट या आंशिक भुगतान लागू कर देती हैं। प्रीमियम कमरों का किराया, इम्प्लांट और रोबोटिक उपकरण शुल्क पर कैप होने से भी क्लेम की पूरी राशि नहीं मिल पाती।
IRDAI के दिशानिर्देशों के अनुसार आधुनिक उपचार कवर होने चाहिए, पर कई कंपनियां शर्तें जोड़ देती हैं। घुटनों के प्रत्यारोपण पर आमतौर पर 2-3 साल का वेटिंग पीरियड होता है। फिजियोथेरेपी आमतौर पर अस्पताल में रहने के दौरान कवर होती है, लेकिन डिस्चार्ज के बाद की फिजियोथेरेपी के लिए पॉलिसी की शर्तों की जांच आवश्यक है।
सर्जरी का चयन करते समय, यदि बजट सीमित है और पॉलिसी में सख्त सब-लिमिट हैं, तो पारंपरिक सर्जरी एक व्यावहारिक विकल्प है। यदि तेज रिकवरी, बेहतर सटीकता और लंबी अवधि के फायदे चाहिए और व्यापक बीमा कवरेज है, तो रोबोटिक सर्जरी बेहतर हो सकती है। सर्जरी से पहले लिखित प्री-ऑथराइजेशन लेना, अस्पताल से अनुमानित खर्च का विवरण लेना और पॉलिसी की बारीकियों को समझना महत्वपूर्ण है।
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